ललितपुर। दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में व बीपीएल कार्ड धारकों के घरों तक बिजली पहुंचाने के कार्य में शिथिलता बरती जा रही है। निर्धारित समय के बाद भी लक्ष्य के सापेक्ष पचास प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो सका है।
दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत जनपद के 1075 गांवों में विद्युतीकरण किया जाना है। इस योजना के तहत 33,382 बीपीएल कार्ड धारकों के घरों को रोशन करने के लिए निशुल्क विद्युत कनेक्शन दिया जाना है। 85 करोड़ रुपए की इस योजना को पूरा करने के लिए कार्यदायी संस्था ईस्ट इंडिया कंपनी को जिम्मा सौंपा गया है। शुरुआत में तो कार्य काफी तेजी के साथ किया गया, लेकिन बाद में धीमी गति से होने लगा। टेंडर में दी गई अवधि में काम नहीं हो सका।
गत दो माह पूर्व तक कार्यदायी संस्था ने 1075 गांव के सापेक्ष मात्र 405 गांव में ही विद्युतीकृत करने की रिपोर्ट विद्युत विभाग को सौंपी थी। इसके बाद शासन द्वारा कार्य की प्रगति रिपोर्ट तलब करने पर जिलाधिकारी के संज्ञान में यह मामला लिया गया। कार्य प्रगति रिपोर्ट मांगी गई। कार्यदायी संस्था द्वारा मात्र 405 गांव में विद्युतीकरण की रिपोर्ट सौंपी गई।
जिलाधिकारी ने कार्य में शिथिलता बरतने पर नाराजगी व्यक्त की थी और तीन माह में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए थे। लेकिन दो माह बीतने के बाद भी लगभग साढ़े पांच सौ गांव में ही कार्य हो सका है। जबकि अब भी पांच सौ से अधिक गांव में विद्युतीकरण होना बाकी है। ऐसे में शासन की योजना का क्रियान्वयन समय से पूर्ण होना मुश्किल लग रहा है। हालांकि कार्यदायी संस्था द्वारा अक्टूबर माह तक विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण करने का दावा किया जा रहा है।
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गांवों में बढ़ गई कनेक्शनों की संख्या
दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत बीपीएल धारक गरीब ग्रामीणों की सूची के हिसाब से संख्या बढ़ गई है। इसके चलते कार्यदायी संस्था निर्धारित बजट में काम पूर्ण करने से कतरा रही है।
नहीं दिया जा रहा है ध्यान
दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना को पहले राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के नाम से जाना जाता था। करीब आठ साल पहले जनपद में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत 272 गांवों का विद्युतीकरण किया गया था। पांच गांवों में वन विभाग की अनुमति न मिलने के कारण विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण नहीं हो सका था। इस काम को आईबीआरसीएल कंपनी द्वारा किया गया था। अनियोजित तरीके से काम कराने के कारण कई गांवों में लाइन शुरू होते ही खराब हो गई थी।
ऑडिट के दौरान गुणवत्ताविहीन सामान, अनियोजित तरीके से लाइन बिछाने का काम सामने आने के बाद कंपनी का तीस फीसदी भुगतान रोक लिया गया था। वर्तमान में 1075 गांवों में चल रहे काम का विभागीय अधिकारियों द्वारा सुपरविजन नहीं किया जा रहा है। योजना के तहत कामों का सुपरविजन अधिशासी अधिकारी व उपखंड