ललितपुर। देश को आजादी मिले 70 वर्ष पूर्ण होने वाले हैं, लेकिन शहर वासियों को अब तक अंग्रेजी हुकूमत के दौरान बनाए गए शहर के दोनों संकरे पुलों की समस्या से आजादी नहीं मिल सकी है। समय के साथ-साथ स्थानीय लोगों की समस्या भी बढ़ती जा रही है। नागरिकों, विभिन्न राजनैतिक दलों व स्वयं लोक निर्माण विभाग द्वारा अनेकों बार शहर के दोनों इंट्री प्वाइंट पर बने पुराने संकरे पुलों के चौड़ीकरण की मांग आला अधिकारियों समेत मुख्यमंत्री से की गई है, लेकिन अब तक इस समस्या की कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
शहर के भीतर झांसी की ओर स्थित ब्याना नाला का पुल व सागर की ओर जाने वाला शहजाद नदी का पुल इन दोनों पुलों का निर्माण ब्रिट्रिश शासन के दौरान कराया गया था। देश को आजाद हुए 70 वर्ष पूरे होने वाले हैं, इस हिसाब से दोनों पुलों का निर्माण हुए एक शताब्दी के करीब बीतने वाला है। इन दोनों पुलों को शुरू से अब तक शहर का इंट्री प्वाइंट माना जाता है। इन दोनों पुलों को जोड़ने वाला मार्ग भी काफी पुराना है, कुछ वर्ष पूर्व तक यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग था।
झांसी-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग-26 फोरलेन बनने के बाद इस मार्ग से भारी वाहनों का आवागमन तो कम हो गया है, लेकिन इससे शहरवासियों की समस्या खत्म नहीं हुई है। दोनों पुलों पर सुबह 9 बजे रात के करीब 9 बजे तक ही जाम की स्थिति निरंतर बनी रहती है। इन पुलों पर से एक बार में एक ही बड़ा वाहन निकल सकता है, जब दोनों ओर से बड़े वाहन की इंट्री पुल पर हो जाती है तो घंटा भर से भी अधिक समय तक जाम लगा रहता है।
आम जनता के अलावा मरीजों को भी इस गंभीर समस्या से घंटों जूझना पड़ता है। ग्रामीण अंचल से गंभीर स्थिति मेें रेफर होकर जिला अस्पताल तक पहुंचने वाले मरीज व जिला अस्पताल से झांसी मेडिकल कॉलेज जाने वाले मरीजों को इन्हीं पुलों से गुजरना पड़ता है।
सूबे के कई मुखिया बदले पर नहीं बदली पुलों की स्थिति
देश की आजादी के बाद ललितपुर शहर को वर्ष 1974 में जनपद बनाया गया था। इसी वर्ष ललितपुर में लोक निर्माण विभाग की स्थापना की गई थी। शहर में बढ़ती वाहनों की तादाद को देखते हुए पिछले करीब 25 वर्षों से स्थानीय नागरिकों, समाजसेवी संगठनों, राजनैतिक दलों व स्वयं लोग निर्माण विभाग के अधिकारियों ने इन वर्षों में बने समस्त मुख्यमंत्रियों, नेताओं व प्रशासनिक अधिकारियों से इन दोनों पुलों के चौड़ीकरण की मांग की जा रही है। लेकिन शासन द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग भी वर्षों से प्रदेश व केंद्रीय स्तर पर पत्राचार करके दोनो पुलों को चौड़ा करने की मांग कर रहा है,
राष्ट्रीय राजमार्ग का पड़ा विपरीत असर
विगत कुछ वर्षों से झांसी-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग को शहरी क्षेत्र से बाहर बाईपास करके बना दिया गया है। इसके बाद से इन संकरे पुलों की ओर शासन का ध्यान अलग हो गया है। यदि राष्ट्रीय राज्यमार्ग अलग नहीं हुआ होता तो, इस मार्ग पर रोड़ा बन रहे इन दोनों संकरे पुलों का चौड़ीकरण शायद अब तक हो गया होता। राष्ट्रीय राजमार्ग तो प्रभावित होने से बचा लिया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों को रोज ही इस जाम की स्थिति से जूझना पड़ रहा है।
ऐसा नहीं है कि विभाग द्वारा शहर के दोनों मुख्य पुलों के चौड़ीकरण के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे है। विभाग नागरिकों की समस्या को समझते हुए पिछले करीब 20 वर्षों से शासन को लगातार प्रस्ताव भेज रहा है और जनपद दौरे पर भी मुख्यमंत्री व विभागीय मंत्रियों से दोनों पुलों के चौड़ीकरण की मांग की गई है। शासन से स्वीकृति व बजट मिलते ही चौड़ीकरण कर दिया जाएगा।
-सुबोध कुमार, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग