ललितपुर। जिले में कुपोषण से मुक्ति के लिए चलाई जा रही योजनाएं बच्चों को कुपोषित नहीं कर पा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के नौ महीने के आंकड़ों में 2648 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं। इनमें से केवल 2049 बच्चों को ही उपचार मिला है। शेष छह सौ बच्चों की डाटा विभाग के पास भी नहीं है।
कुपोषण से बच्चों को बचाने के लिए शासन द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें बच्चों को स्वस्थ्य रखने के लिए पूरक आहार वितरित किया जाता है। बच्चों का आंगनबाड़ी केंद्र पर वजन किया जाता है। बच्चे का तय मानक के अनुसार कम वजन होने पर एएनएम द्वारा जांच की जाती है। जांच में अतिकुपोषित होने पर पास के ही अस्पताल में आशा या आंगनबाड़ी द्वारा पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाता है। इसके लिए आशा और आंगनबाड़ी को पचास रुपये की राशि दी जाती है। आरबीएसके टीम द्वारा भी बच्चों केे एनआरसी में भर्ती कराया जाता है। चिकित्सकों की जांच में कुपोषित होने की स्थिति में एनआरसी केंद्र में भर्ती कराया जाता है।
पोषण पुनर्वास केंद्र पर बच्चों को भर्ती रखकर पूरक आहार दिए जाते हैं। इसके साथ ही अन्य पोषक तत्वों का सेवन कराया जाता है। प्रतिदिन बच्चे का वजन मापकर परिवर्तन की स्थिति की जानकारी की जाती है। बच्चों के साथ रहने वाली तीमारदार मां को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसके बाद भी जिले में बच्चों में कुपोषण कम नहीं हो पा रहा है।
जिले में नौ महीने में 2648 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए। इनमें केवल 2049 बच्चों को एनआरसी में भर्ती कर उपचार दिया गया। शेष लगभग छह सौ बच्चों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं है। जबकि, अतिकुपोषित बच्चों को बेहतर इलाज की जरूरत है, जिससे कि सेहत में सुधार हो सके। लेकिन, इन छूटे बच्चों पर विभाग द्वारा न तो कोई विचार किया गया है और न ही कोई उपचार मिल पाया है।
केंद्र पर भर्ती होने वाले बच्चों की जांच कर उपचार मुहैया कराया जाता है। केंद्र पर नहीं आने वाले बच्चों को उपचार की सुविधा नहीं मिल पाती है।
- डॉ. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
आंगनबाड़ी व आशा द्वारा अतिकुपोषित बच्चों की माताओं को जानकारी देकर भर्ती करने के लिए जागरुक किया जाता है।
- डॉ. हुसैन खां, नोडल अधिकारी, एनआरसी