एक दर्जन मंदिरों की श्रृंखला से घिरा सुम्मेरा तालाब नगर का हृदय स्थल माना जाता है। महारानी ललितेश्वरी देवी ने धार्मिक कार्यक्रमों के लिए इस तालाब का निर्माण कराया था। तब से लेकर अब तक इसमें धार्मिक आयोजन होते चले आ रहे हैं। जल विहार व कार्तिक मास में तालाब पर श्रद्घालुओं की भीड़ उमड़ती है। पूरे नगर से आने वाले लोग इसमें स्नान करते हैं। कुछ सालों से तालाब में बढ़ती जलकुंभी व सिल्ट को देखते हुए इसके सौंदर्यीकरण का खाका तैयार किया गया। अतिक्रमण को रोकने के लिए चारों ओर दीवार का निर्माण, पुरानी सीढ़ियों का जीर्णोद्घार, नई सीढ़ियों का निर्माण, पाथ- वे के साथ तालाब के बीच में घूमने व व्यंजन का मजा लेने के लिए एक टापू व कैंटीन बनाई जानी है। वोटिंग करने के लिए पांच फीट गहराई तक सिल्ट को निकालने का काम किया जाना है।
पर्यटन विभाग की कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड(यूपीपीसीएल) इसका सौंदर्यीकरण करने का काम कर रही है। 4.2 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे इस कार्य में दीवार का निर्माण अंतिम चरण में है तथा पाथ- वे के लिए जेसीबी से मिट्टी डाली जा रही है। लेकिन, पाथ- वे को कई स्थानों पर संकरा बनाया जा रहा है तथा गुणवत्ता का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। गहराई पर तो जिम्मेदारों का ध्यान ही नहीं है। इससे काम पूर्ण भी हो गया तो वोटिंग करना आसान नहीं होगा। पानी के निकासी मार्ग सहित अन्य स्थानों पर इतनी ऊंचाई तक सिल्ट जमा है कि नाव चलाना या वोटिंग करना संभव नहीं हो सकेगा। जिम्मेदार अफसरों को इसकी जानकारी होने के बाद भी निर्माण कार्य पर नजर नहीं रखी जा रही है, न ही सिल्ट दूर कराने के कार्य में तेजी लाई जा रही है।