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Lalitpur News: बाजार के अभाव में बंद होने के कगार पर सिल्क साड़ी व्यवसाय

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ललितपुर। जनपद का सिल्क साड़ी व्यवसाय बाजार की उपलब्धता न होने के कारण विलुप्त होता जा रहा था। कारीगरों को उचित मूल्य व उनका तैयार माल न बिकने के कारण वे इस व्यवसाय से मुंह मोड़ रहे थे। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने एक जनपद एक उत्पाद योजना का आगाज किया। जिसमें सिल्क साड़ी व्यवसाय को जोड़ा गया। सरकार की इस पहल से ऐसा लग रहा था कि अब इस उद्यम से जुड़े लोगों को उनके तैयार माल को बेचने के लिए बाजार उपलब्ध हो जाएगा। लेकिन बाजार उपलब्ध न होने से इस योजना का लाभ धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है।
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जिले में एक जनपद एक उत्पाद में सिल्क साड़ी को शामिल किया गया, जिसमें जनपद में हथकरघा उद्योग से निर्मित होने वाली सिल्क की साड़ी को जीवनदान मिल गया। लेकिन, तैयार माल के लिए उचित बाजार न मिलने के कारण कारीगरों का इस व्यवसाय की ओर से ध्यान हट रहा है। वर्तमान में चंदेरा औद्योगिक आस्थान में सिल्क साड़ी की एक इकाई स्थापित कर दी गई है। यहां पर ही एक शोरूम संचालन कर इसको बेचा जा रहा है। यह साड़ी हाथ से निर्मित होने के कारण काफी महंगी होती है। इसके ग्राहक गिने चुने ही होते हैं। उद्योग विभाग को एक जनपद एक उत्पाद के तहत एक क्लस्टर तैयार करना था, जिसमें उत्पादन के अनुसार उस माल को बाजार में उचित दिलाने के लिए निर्माता व विक्रेता को एक मंच पर जोड़ना था। लेकिन वर्तमान में यह संभव नहीं हो पाया है।

देश ही नहीं विदेशों में भेजी जाती है यह साड़ी
पुराने समय में सिल्क साड़ी की पहचान चंदेरी साड़ी के नाम से होती थी। जिसकी देश व विदेशी बाजारों में काफी मांग थी। फिर बाजार में मशीनरी युग आया, जिससे हाथ से बनी साड़ी महंगी होती चली गई। वहीं, मशीन से निर्मित साड़ी सस्ती होने के कारण बाजार में इसकी मांग कम हो गई।
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वर्जन
ओडीओपी योजना के तहत देश में लगने वाले बड़े मेलों में इन निर्माताओं को भेजा जाता है। जिससे इन्हें बाजार मिल सके, क्लस्टर योजना अभी प्रक्रिया में है। उसके लागू होने से इस उद्योग से जुड़े लोगों का लाभ होगा।
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-अतहर जमाल, उपायुक्त उद्योग।
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