अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर-मड़ावरा। श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र गिरारगिरी में मुनि समत्व सागर महाराज ने कहा कि सिद्धचक्र विधान केवल एक अनुष्ठान नहीं, आत्मशुद्धि की प्रयोगशाला है। जब श्रद्धा, शुद्ध भावना और संयम एक साथ साधे जाते हैं, तब आत्मा सिद्धत्व की दिशा में अग्रसर होती है। उन्होंने कहा कि आज का मानव बाहर की समृद्धि में उलझ गया है, जबकि सच्चा सुख भीतर की शांति में है। सिद्धों की आराधना हमें यही सिखाती है कि इच्छाओं का क्षय ही दुखों का क्षय है। उन्होंने युवाओं से कहा कि यदि लक्ष्य ऊंचा हो और दृष्टि आत्मकल्याण की हो तो त्याग कठिन नहीं लगता। संयम ही वह शक्ति है जो जीवन को सार्थक बनाती है।
श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र गिरारगिरी में 16 जनवरी से 25 मंडलीय 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान, वार्षिक मेला, विश्व शांति महायज्ञ एवं भव्य रथोत्सव संपन्न हो रहा है। मंगलवार को 25 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतर्गत 64 अर्घ्य विधान सौधर्म इंद्र-सुनील कुमार जैन एवं नेहा जैन, कुबेर इंद्र-सुनील कुमार जैन एवं प्रीति जैन, मैना सुंदरी-विनोद कुमार जैन एवं सुशीला जैन, महायज्ञ नायक- प्रकाश चंद्र जैन एवं सुगंधी जैन, यज्ञ नायक-सुरेश चंद्र जैन एवं संध्या जैन, ईशान इंद्र-प्रवीण जैन एवं निर्मला जैन सहित अन्य पात्रों ने भक्ति नृत्य किए।
संपूर्ण परिसर सिद्धाराधना की भक्ति बयार से ओतप्रोत हो उठा। विधान विधानाचार्य पंडित मनोज शास्त्री, पंडित देवेंद्र शास्त्री एवं पंडित विकर्ष शास्त्री करा रहे हैं। सुबह मंगलाष्टक के पश्चात श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। सिद्धाराधना में पात्रों ने अर्घ्य समर्पित किए। पुण्यार्जक परिवारों द्वारा मुनिश्री का पाद प्रक्षालन किया गया। मौके पर गिरारगिरी कमेटी अध्यक्ष चक्रेश जैन, महामंत्री प्रदीप जैन, कोषाध्यक्ष मुकेश सिंघई, आयोजन समिति अध्यक्ष अनिल जैन, महामंत्री राजेश, कोषाध्यक्ष दीपचंद्र जैन, अभिषेक जैन आदि मौजूद रहे। अमेरिका की चमक-दमक छोड़ आत्मकल्याण का पथ चुना प्रचार मंत्री डॉ. सुनील संचय ने बताया कि गिरारगिरी महोत्सव में सान्निध्य प्रदान कर रहे मुनि समत्वसागर महाराज आधुनिक युग के विरले संतों में से हैं।