संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। तालाबपुरा डोंडाघाट में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास आचार्य हेमंत कृष्ण महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीकृष्ण अपने भक्तों के हृदय का हरण करते हैं। भक्तों की पीड़ा एवं जन्म-जन्म के पापों का भी हरण करते हैं। संतों के हृदय को भी माखन कहा गया है।
उन्होंने कहा कि बड़ों का बड़प्पन उनके सहज स्वभाव से ही प्रकट होता है। आप जितने बड़े होंगे उतने ही विनम्र होंगे। पूतना के विषय में कहा कि अपवित्र विचार, अमर्यादित बोल और स्वच्छंद स्वभाव पूतना की प्रवृत्ति है। श्री हरि पदार्थ के भूखे नहीं हैं वो तो भाव के भूखे हैं। भगवान श्रीकृष्ण की सभी लीलाएं ईश्वरीय हैं। उनको मनुष्य बुद्धि से नहीं समझा जा सकता है।
श्री गोवर्धन का प्रसंग सुनाते हुए महाराज ने कहा कि गिर्राज प्रकृति का रूप है। गिर्राज का पूजन करवाकर प्रभु ने जगत को प्रकृति के पूजन का संदेश दिया। गिर्राज जी महाराज की पूजा के लिए आयोजक परिवार ने छप्पन भोग निवेदित किए। कथा की आरती में मुख्य यजमान राकेश तामियां, कविता, अमन तामियां के अलावा गीता प्रभुदयाल तामियां, प्रिया अजय तामियां, निशी नीलांश तामियां, रितु विराज तामियां, रामस्वरूप तामियां, सीताराम तामियां उपस्थित रहे। जबकि, व्यवस्था में सहयोगी के रूप में श्री रामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति और श्री भारत सेवा मंडल व्यायामशाला शामिल रहीं।