ललितपुर। आर्यिकारत्न पूर्णमति माताजी ने कहा कि जीवन में संयोग व वियोग की निवृत्ति का उपाय धर्म है। पाप को हेय बताते हुए कहा कि ज्ञान चक्षु खोलकर देखने में जब प्रभु नजर आएंगे, तभी कल्याण संभव है।
श्री क्षेत्रपाल मंदिर में अहर्चक्र महामंडल विधान का शुभारंभ भगवान श्रीजी के अभिषेक व शांतिधारा के साथ हुआ। इसमें दो हजार से अधिक इंद्र व इंद्राणी शामिल हुए। विधान के चक्रवर्ती मुन्नालाल जैन सैदपुर, कुबेर आकाश जैन, सौधर्म इंद्र जितेंद्र नजा, महायज्ञ नायक रोहित जैन अनौरा और बाहुबलि स्वतंत्र मोदी ने भगवान ऋषभदेव के समोवशरण में बैठकर पूजन-अर्चन की। इसी के साथ 24वे तीर्थंकर भगवान का समोवशरण भी लगा, जिसमें इंद्र और इंद्राणि शामिल हुए। विधान का मार्गदर्शन प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप जैन सुयश ने किया। इसके पूर्व में विधान की पुस्तिका का विमोचन अरविंद चौधरी द्वारा किया गया।
दीप प्रज्ज्वलन डा. अक्षय टडैया और अरविंद जैन द्वारा किया गया, जबकि भगवान अभिनंदन नाथ का छत्र सुमत जैन परिवार द्वारा चढ़ाया गया। मध्याह्न में विधान की मांगलिक क्रियाए संपन्न हुईं। इस दौरान कुबेर ने समोवशरण में रत्नों की वृष्टि की। सायंकाल राजू जैन ननौरा परिवार के आवास से महाआरती निकली।
इस मौके पर जैन पंचायत के अध्यक्ष डा. अनिल जैन अंचल, सुंदर लाल अनोरा, प्रदीप जैन सतरवांस, भगवान दास कैलगुवां, मीना इमलिया, आनंद जैन, शीलचंद अनौरा, राजेंद्र जैन थनवारा, मोदी पंकज जैन, मुकेश सराफ, मनोज जैन बबीना, संजीव जैन, कपूर चंद लागौन, सत्येंद्र जैन गदयाना, अक्षय अलया, सतीश जैन नजा, अशोक दैलवारा, जिनेंद्र जैन, जिनेंद्र जैन थनवारा, आनंद जैन धनगौल आदि मौजूद रहे।