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अज्ञानता से मुक्ति का साधन है श्रावक संस्कार शिविर

Thu, 10 Sep 2015 01:53 AM IST
ब्यूराे/अमर उजाला
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ललितपुर। श्रावक संस्कार शिविर की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए आर्यिकारत्न पूर्णमति माताजी ने कहा कि सांसारिक अज्ञानता से मुक्ति का साधन शिविर हैं । शिविर में श्रावकों को शुभ कार्यों में लगाने की भावनात्मक अनुभूति होती है। यह शिविर ज्ञान स्वरूपी आत्मज्ञान का प्रतीक हैं। 10 दिन तक चलने वाले संस्कार शिविर में ब्रह्मचारी भैया-बहनों द्वारा धार्मिकता व नैतिकता का बोध कराया जाता है।
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श्री क्षेत्रपाल मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि श्रावकों को चाहिए कि संस्कारों को संवराने के लिए लगने वाले शिविरों में  सम्मलित हों, इससे जीवन संवारा जा सकता है। 10 दिन तक उत्कृष्ट त्याग की भावना से त्याग करने वाले शिविरार्थियों को आहार देने का पुण्यार्जन महिला शिविरार्थियों द्वारा किया जाता है। इसके माध्यम से ऐसे परिवारों को शुद्ध भोजन करने और कराने का मौका मिलता है।




शिविर में अभिषेक पूजन, शांतिधारा सामायिक साधना, य्गुरू भक्ति, आरती के अलावा भक्तांबर पाठ, तत्वार्थ सूत्र आदि का प्रशिक्षण भी मिलेगा। श्रावक शिविर को अनुपम व अद्वितीय बताते हुए उन्होंने कहा कि साधु सानिध्य में जहां श्रावकों को अपनी साधना का मौका मिलता है, वहीं जीवन जीने की कला भी मिलती है।
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धर्मसभा का मंगलाचरण विमल जैन सुमन ने किया। आर्यिकाश्री को शास्त्र भेंट श्रावक श्रेष्ठी जिनेश्वरदास, अनिल कुमार, राजीव कुमार, संजीव कुमार सिंघई सीएसी परिवार ने  किया। आचार्यश्री के चित्र का अनावरण अनुराग सिंघई, प्रकाश मयूर, मनोज नजा, प्रकाश अनमोल, अजय अलया, चद्रकांत, अरविंद मामा और पुष्पेंद्र ककडारी ने किया। अंकुर लकी, अनिल पंसारी, अजय जैन बल्ले, राहुल चौधरी, प्रियंक जैन मोदी, संजय सर्राफ ने प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

आचार्य वर्द्धमान सागर के स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना
ललितपुर। राजस्थान के निबाई जिले में चातुर्मास कर रहे वात्सल्य मूर्ति आचार्य वर्द्धमान सागर महाराज के अचानक अस्वस्थ होने की खबर मिलने पर आर्यिका पूर्णमति माताजी के सानिध्य में जैन समाज ने उनके शीघ्र स्वस्थ्य होने की कामना की। इस मौके पर जैन पंचायत के महामंत्री डा. अक्षय टडैया, संयोजक प्रदीप जैन सतरवांस, मुकेश सर्राफ, कपूर चंद लागौन, भगवान दास कैलगुवां, राजेंद्र जैन थनवारा, पार्षद पंकज जैन, जितेंद्र जैन राजू, शुभेंदु जैन, विमल जैन पाय, सत्येंद्र जैन गदयाना, मनोज जैन बबीना, नीरज जैन मुल्लन, गेंदालाल सतभैया, गोकुलचंद सरोज, जिनेंद्र जैन डाकपाल, अभिषेक अनौरा, विजय जैन काफी हाउस, जिनेंद्र जैन डिस्को, सुधीर जैन मौजूद रहे।
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