ङोगरा खुर्द/ललितपुर। ग्राम पारौल के पास विंध्याचल पर्वत की श्रृंखला के मध्य स्थित सिद्ध क्षेत्र तपो भूमि पांडव वन का रास्ता दुरुस्त नहीं हो पा रहा है। इस रास्ते को पक्का कराने के लिए तत्कालीन डीएम ने तीन बार प्रस्ताव बनवाया लेकिन वे इसके लिए धनराशि का इंतजाम कराने में कामयाब नहीं हो सके। इस बात की टीस स्थानीय लोगों में दिखती है।
पांडव भले पर्यटकों को आकर्षित करता हो, लेकिन यहां का पांच किलोमीटर का कच्चा रास्ता मुश्किल भरा है। बारिश के दिनों में वाहन से पहुंचना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। महाभारत काल में पांडवों को अज्ञात वास दिया गया था, तब पांचों पांडवों ने द्रोपदी समेत वनवास काल को विंध्याचल पर्वतों पर बिताया था। यहां वर्षों से हर बार मकर संक्रांति पर सात दिवसीय मेला का आयोजन होता है, जिसमें हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसकी व्यवस्थाएं प्रशासनिक की देखरेख में ग्राम पारोल की मेला समिति द्वारा कराया जाता है। मेला के समय ग्राम प्रधान व ग्रामीणों द्वारा मिट्टी डालकर इसे पैदल चलने योग्य बना दिया जाता है लेकिन बारिश में मिट्टी पूरी तरह से बह जाती है। जिससे सड़क पर जगह-जगह कंकड़ दिखाई पड़ते हैं। ग्रामीणों ने सड़क डलवाए जाने की मांग की है।
कई बार जनप्रतिनिधियों ने सड़क बनवाने के लिए ज्ञापन दिए हैं। यहां आने वाले पर्यटकों को सड़क नहीं होने से दिक्कतें आती है। दीपेंद्र सिंह, क्षेत्र पंचायत सदस्य
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पांडव वन धाम पर जाने वाला रास्ता बनवाने का प्रस्ताव कई बार भेजा गया है लेकिन किन्हीं कारणों से स्वीकृत नहीं हो पाया है। चंदन सिंह प्रधान प्रतिनिधि पारौल
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पांङव वन की सड़क सीमेंटेट बननी चाहिए, जिससे कि ज्यादा दिनों तक चल सके। पं. महेंद्र शास्त्री
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यह हैं दर्शनीय स्थल
अज्ञातवास के दौरान बिताए गए स्थान को तपो भूमि पांडव के नाम से जाना जाता है। यहां पर जामनी नदी के किनारे पांचों पांडव व द्रोपदी की पिंडीनुमा मूर्तियां स्थित हैं। प्राचीन पूरबमुखी हनुमान मंदिर भी है। हनुमानजी अहरावण को अपने चरणों रखे हुए हैं। इसके अलावा पांडवों द्वारा खेले गए शैरा नृत्य के पद चिन्ह जामनी नदी में पत्थरों पर दर्शित हैं। पांडव वन की गुफाओं में भित्ति चित्र बने हुए हैं।
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तत्कालीन जिला अधिकारी योगेश कुमार शुक्ल के निर्देश पर पांच किमी पांडव वन तक जाने का स्टीमेट बनवाया था। 2,75 लाख रुपये के स्टीमेट को जिला योजना में तीन बार बनाकर भेजा गया है लेकिन धनराशि नहीं मिली।
एम के रिजवी, अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग
पाडंव वन का रास्ता- फोटो : LALITPUR