डोगरा खुर्द/ ललितपुर। पांच किलोमीटर की सड़क जोखिम भरी साबित हो रही है। ग्राम गुरयाना पारौल का रास्ता पूरी तरह खस्ताहाल अवस्था में है। यहां न केवल पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई है, बल्कि सड़क पर बड़े- बडे़ गड्ढे उभर आए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस पर सड़क को बनाते समय उसकी गुणवत्ता का बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया है। सड़क निर्माण में काली मिट्टी का प्रयोग किया गया है, जिस कारण बारिश होते ही सड़क पर छोटे-बड़े गड्ढे उभर आते हैं। जब इसका निर्माण कराया गया था, उसके ठीक चार महीने बाद ही सड़क खराब होने लगी थी। सड़क की मरम्मत के नाम पर लीपापोती की गई। इससे ग्रामीणों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। इस सड़क से दर्जनों गांव के लोगों का आना - जाना रहता है। इसमें गौना, नाराहट, बछरई, मकरीपुर, ललितपुर, बनयाना, ककरूआ, अर्जुन खिरिया, तरावली, महाराज पुरा, बरेजा, दिगवार, डोंगरा खुर्द, चांदोरा, गुढ़ा खिरिया, गुरयाना, देवरी, सिंगवारा, पटना पारौल आदि गांवों के राहगीर इसी सड़क से निकलते हैं। वाहन चालकों को खस्ताहाल सड़क से निकलने में परेशानी हो रही है। बरसात के समय सड़क के छोटे-बड़े गड्ढों में आए दिन वाहन फंस जाते हैं। करीब पांच किलोमीटर सड़क वाहन चालकों के लिए जोखिम भरा सफर साबित हो रहा है। दर्शनीय स्थल पांडव वन जाने वाले दर्शनार्थियों एवं पर्यटकों को इसी सड़क से गुजरना पड़ता है। मकर संक्रांति पर पाडंव वन में मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रृद्धालु पहुंचते हैं।
इस सड़क पर दर्जनों गांव के लोगों का आवागमन रहता है। करीब दो साल से पुलिया क्षतिग्रस्त है, साथ ही सड़क खस्ताहाल होने से राहगीरों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। - अभिषेक तिवारी
सड़क पर लोगों को बरसात के समय खासी परेशानी होती है। सड़क बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। -वृंदावन कुशवाहा
सड़क पर क्षतिग्रस्त पुलिया हादसों को न्योता दे रही है। बरसात के दिनों में राहगीरों को आवागमन में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। - दिलीप सिंह गुरयाना