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बुंदेलखंड की धरती पर यहां के नौजवानों को ही मिले रोजगार

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गूगल मीट पर संगोष्ठी का आयोजन करते बुंदेलखंड राज्य निर्माण वैचारिक मंच - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। बुंदेलखंड राज्य निर्माण वैचारिक मंच ने बुंदेलखंड की धरती पर बुंदेलखंड की भर्ती हो विषय पर आयोजित वैचारिक संगोष्ठी में पृथक प्रांत निर्माण पर बल दिया । रविवार की शाम 6 बजे आयोजित गूगल मीट में समाज के विभिन्न वर्गों के विद्वानों ने भाग लिया।
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डॉ. अनीष पांडे महोबा ने कहा कि बुंदेलखंड राज्य कोई नई मांग नहीं है। यहां के किसानों और नौजवानों की समस्याओं का समाधान बुंदेलखंड राज्य द्वारा ही संभव है। अधिवक्ता अनुराग सिंह ने कहा कि यदि बुंदेलखंड राज्य बनता है तो यहां सरकारी नौकरियों के अवसर भी बढ़ेंगे, साथ ही आत्महत्या में भी कमी आएगी। अखिलेश मिश्रा ने बुंदेलखंड राज्य निर्माण के लिए ांकरलाल मल्होत्रा के योगदान को याद करते हुए उनके संकल्प को आगे बढ़ाने मांग की। मयंक बबेले ने युवा और नौजवानों से बुंदेलखंड क्षेत्र की सांस्कृतिक और भौगोलिक विरासत का विस्तृत अध्ययन करने की बात कही। पार्षद आलोक मयूर जैन ने कहा कि चुनाव के समय ही बुंदेलखंड राज्य की मांग गर्माती है। कुंवर घनेन्द्र प्रताप सिंह परमार बानपुर ने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र के बेरोजगारों को रोजगार के लिए भटकना पड़ता है। धर्मेंद्र सोलंकी मऊरानीपुर ने कहा कि बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग जन मन में लंबे समय से व्याप्त है। हेमंत तिवारी ने बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बी एल तिवारी की पंक्तियों हरी-भरी सब धरती हो, बंजर भूमि न परती हो के नारे को प्रासंगिक बताया। संगोष्ठी में डॉक्टर अनीश पांडे महोबा, आलोक जैन मयूर, सत्यपाल सिंह यादव, आलोक श्रीवास्तव, अभिषेक मिश्रा, धर्मेंद्र सोलंकी झांसी, अनंत तिवारी, देवेंद्र रावत, हृदेश गोस्वामी, जसवंत सिंह, मयंक बबेले, संगीता कुमारी, रूबी मिश्रा, सीमा त्रिपाठी, आसा देवी, मनोज सक्सेना, प्राणेश मिश्रा, अनुज पटैरिया, दिलीप रैकवार, पवन यादव आदि ने विचार व्यक्त किए।
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