ललितपुर। नगर निकायों में स्वकर प्रणाली लागू हुए पूरे दो वर्ष होने वाले हैं, लेकिन स्थानीय नगर पालिका अब तक स्वकर प्रणाली लागू करने की बात को दूर, सर्वे का कार्य ही पूर्ण नहीं करा पाई है। एक वर्ष पूर्व अलीगढ़ की कंपनी को 75 लाख रुपये में स्वकर सर्वे करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। स्वकर प्रणाली लागू नहीं हो पाने के कारण दो वर्षों से गृहकर वसूली रुकी हुई है, जिससे विभाग को लगातार राजस्व की हानि हो रही है।
नगर निकायों की आय बढ़ाने के लिए शासन ने 01 अप्रैल 2014 के गृहकर वसूलने के लिए प्रदेश की समस्त नगर निकायों में स्वकर प्रणाली लागू कर दी है। स्वकर प्रणाली लागू होने से नगर पालिका को हर वर्ष करीब दो करोड़ रुपये का अतिरिक्त फायदा होगा। इसमें भवन के आकार व लोकेशन के अनुसार कर निर्धारित किया जाना है।
इसके अलावा नगर पालिका अब तक खाली प्लाटों व व्यवसायिक भवनों से कर नहीं वसूलती थी, लेकिन स्वकर में दोनों पर ही कर वसूला जाना है। आवासीय भवन से करीब चार गुना टैक्स व्यवसायिक भवन से वसूला जाना है, जिससे विभाग के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। नगर पालिका ने स्वकर सर्वे कराने के लिए अलीगढ़ की निजी कंपनी जॉनटेक प्राइवेट लिमिटेड को करीब 75 लाख रुपये में ठेका दिया था। सर्वे का कार्य नवंबर माह से शुरु किया जाना था और तीन माह के भीतर सर्वे का कार्य पूर्ण करना था। ताकि वित्तीय वर्ष 2015-16 से स्वकर प्रणाली लागू कर दी जाए और इसी के आधार पर वसूली शुरु हो सके। कंपनी को ठेका दिए एक वर्ष बीत गया, लेकिन अभी तक कंपनी द्वारा सर्वे का काम पूरा नहीं हो सका है। स्वकर प्रणाली लागू होने के इंतजार में नगर पालिका वर्ष 2014 से वसूली नहीं कर रही है। दो वर्षों से गृहकर की वसूली नहीं हो पाने के कारण विभाग को राजस्व की लगातार क्षति पहुंच रही है।
जनता पर बढ़ेगा अतिरिक्त बोझ
कंपनी व विभागीय लेटलतीफी का खामियाजा जनता को भी भुगतना पड़ेगा। स्वकर प्रणाली लागू होने के बाद पुराने गृहकर में कई गुना तक बढ़ोत्तरी हो जाएगी। जनता को एक साथ दो वर्ष का यह बढ़ा हुआ कर अदा करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा समय से भुगतान नहीं कर पाने के कारण जुर्माना भी भरना पड़ेगा। गृहकर के साथ-साथ जनता पर जलकल का बोझ बढ़ जाएगा। गृहकशर का सवा गुना जलकल जनता को अदा करना पड़ता है, स्वकर लागू होने के बाद जनता पर सवा गुना जलकल का भी बोझ बढ़ जाएगा। कुल मिलाकर सर्वे करने वाली कंपनी व विभागीय लेटलतीफी का अंजाम जनता को भुगतना पड़ेगा।
इन कारणों से नहीं हो सका सर्वे का कार्य
कंपनी को मार्च माह की शुरुआत तक सर्वे का कार्य पूर्ण करना था, लेकिन शुरुआती दौर में कंपनी द्वारा लापरवाही की गई, फिर गर्मियों की मौसम में सर्वे का कार्य थीमी रफ्तार से हुआ। कंपनी ने आन-फानन में फर्जी व मनमाने तरीके से सर्वे पूर्ण करके जुलाई माह में नगर पालिका को करीब 34 हजार भवनों की भारी-भरकम रिपोर्ट सौंप दी और भुगतान की डिमांड करने करने लगे। नगर पालिका के कर-करोत्तर विभाग के अधिकारियों ने जब कंपनी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट का भौतिक सत्यापन किया तो काफी अनियमितताएं सामने आई। उस दौरान विभागीय अधिकारियों ने वार्ड नवंबर 18 में सर्वे किया था, इस दौरान उन्होंने करीब एक दर्जन भवन जांच जिसमें सभी में गड़बड़ी मिली। कंपनी ने कई लोगों के मकान गायब कर दिए तो वहीं व्यवसायिक भवनों को आवासीय दर्शा दिया। यह अनियमितताएं सामने आने के बाद विभाग ने कंपनी का भुगतान रोक दिया है। इसके बाद नगर पालिका ने जब अपने पुराने रिकॉर्ड से मिलान किया तो पूर्व में दर्ज 24,644 मकानों में से सैकड़ों मकान स्वकर सर्वें की सूची में गायब मिले। नगर पालिका ने कंपनी को अनियमितताएं दूर करने के लिए रिपोर्ट वापिस कर दी है। यह सर्वे का काम बाहरी कंपनी को इस उद्देश्य से दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद काफी अनियमितताएं पाई गई, जिससे सर्वे में विलंब हो रहा है। जब कंपनी सर्वे रिपोर्ट फाइनल कर देगी, जो इसके बाद सर्वे रिपोर्ट को सार्वजनिक करके जनता से आपत्ति ली जाएगी, इसके बाद विभागीय औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद स्वकर प्रणाली लागू हो सकेगी। नगर पालिका वर्तमान में इस प्रयास में है कि किसी तरह नवीन वित्तीय वर्ष 2017-18 से स्वकर प्रणाली लागू हो सके।
सीमा विस्तार के बाद जुड़ेंगे नए मकान
नगर पालिका पिछले दो वर्षों में स्वकर प्रणाली लागू नहीं कर पाई है। वहीं सर्वे के लिए 75 लाख रुपये में निजी कंपनी को ठेका दिया है, जो एक वर्ष बीतने के बाद भी पूर्ण नहीं हो पाया है। इसके अलावा नगर पालिका सीमा विस्तार के लिए कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है, जिसकी शासन से अधिसूचना भी जल्द ही लागू हो जाएगी। सीमा विस्तार होने के बाद विस्तार हुए क्षेत्र के मकान नगर पालिका क्षेत्र में आ जाएंगे, जिन्हें जोड़ने के लिए होने वाले सर्वे पर विभाग दोबारा लाखों रुपए खर्च करेगा।
कंपनी द्वारा लेटलतीफी बरती जा रही है, अब एक वर्ष इंतजार करने के बाद यदि कंपनी का ठेका निरस्त किया जाता है, तो फिर शुरुआत से कार्रवाई शुरू करनी पड़ेगी। नई कंपनी को भी समय लगेगा। सर्वे में जो खामियां सामने आई हैं उन्हेें जल्द ही कंपनी से दूूर कराकर लिया जाएगा। विभाग का पूरा प्रयास है कि नवीन वित्तीय वर्ष से गृहकर की वसूली स्वकर प्रणाली के आधार पर ही की जाए।
राकेश कुमार
अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका ललितपुर।