शुक्रवार को प्रदेश की विधानसभा में विस्फोटक मिलने के बाद भले ही सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया हो, लेकिन जनपद में सुरक्षा तंत्र बेफिक्र है। सुरक्षा के नाम पर मात्र खानापूरी की जा रही है। न तो कहीं चेकिंग की जा रही है और न ही कोर्ट, कचहरी, बस स्टैंड या मंदिरों में सुरक्षा कर्मचारी ही तैनात किए गए हैं। ऐसे में जिले में सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है।
प्रदेश में आतंकवाद का खतरा मंडरा रहा है। गत तीन दिन पूर्व लखनऊ विधानसभा में विस्फोट मिलने की खबर से सुरक्षा ऐजेंसियां अलर्ट हो गई हैं और प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। इसके तहत मुख्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में चेकिंग के साथ सुरक्षा की बढ़ा दी जाती है। जिला प्रशासन के सहयोग से पुलिस प्रशासन द्वारा पैदल मार्च करके शक्ति प्रदर्शन भी किया जाता है, ताकि पुलिस की मुस्तैदी का एक संदेश असामाजिक तत्वों के साथ ऐसे आतंकवादी संगठनों तक भी पहुंच सके और क्षेत्रवासी भी खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। लेकिन, जनपद में सुरक्षा के नाम पर पुलिस व जिला प्रशासन द्वारा खानापूर्ति की जा रही है। शहर में कोर्ट, कचहरी, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, तुवन मंदिर, चंडी मंदिर, सुम्मेरा तालाब स्थित छोटी देवी माता मंदिर, कटरा बाजार, सुभाष मार्केट में साड़ी लाइन, लोहा पीतल मार्केट, जूता चप्पल लाइन, सावरकर चौक, आजादचौक, ललित टाकीज के पास मार्केट, सदरकांटा आदि मुख्य क्षेत्रों में हर समय भीड़ बनी रहती है।
कचहरी परिसर में रोजाना सैकड़ों वकील और वादकारी एवं कैदी पहुंचते हैं, लेकिन यहां भी सामान्य दिनों की भांति ही आवागमन देखने को मिला। बस स्टैंड पर दोपहर एक बजे कोई भी सुरक्षा कर्मचारी नहीं देखा गया। यहां पुलिस बूथ तो बनाया गया है, लेकिन यह पुलिस बूथ मात्र शोपीस बना हुआ है। इसके बाद जिला अस्पताल में भी रोजाना की तरह ही मरीजों, तीमारदारों का वाहनों से आवागमन जारी रहा, लेकिन यहां भी सुरक्षा के लिहाज से न तो चेकिंग होती दिखी और न ही कोई सुरक्षा कर्मी ही मौजूद रहा। जिला अस्पताल में प्रवेश व बाहर के द्वार पर अब तक मैटल डिटेक्टर भी नहीं लगाए गए हैं। यही हाल रेलवे स्टेशन का भी रहा, जब दोपहर करीब साढ़े तीन बजे प्लेटफार्म पर यात्रियों का आवागमन के साथ ही ट्रेनों के इंतजार करते देखे गए, लेकिन सुबह से दोपहर साढ़े तीन बजे तक कोई चेकिंग करते नहीं देखा गया। हालांकि जीआरपी व आरपीएफ के कर्मचारी थाने में उपस्थित रहे, लेकिन प्लेटफार्म पर एक दो कर्मचारी घूमते दिखाई जरुर दिए।
वहीं वेटिंग हॉल में भी लोग बिना किसी रोकटोक के आते जाते रहे। रेलवे स्टेशन पर मुख्य गेट के बाहर रैलिंग तो लगाई गई है, लेकिन प्रवेश द्वार पर सुरक्षा के लिहाज से आज तक मैटल डिटेक्टर नहीं लगाया गया है। इससे भी बुरा हाल मंदिरों का रहा। इस समय सावन मास होने के चलते शहर के चंडी धाम मंदिर में सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण का आयोजन चल रहा है, जहां हर रोज सैकड़ों श्रद्घालु पार्थिव शिवलिंग निर्माण में पहुंचते हैं। लेकिन, यहां भी पुलिस सुरक्षा के नाम पर कुछ भी दिखाई नहीं दिया। ऐसे में जहां विधानसभा में विस्फोटक मिलने से प्रदेश में हाईअलर्ट घोषित किया गया है, वहीं जनपद की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है।
बस स्टैंड पर रहता असामाजिक तत्वों का जमावड़ा
शहर के मुख्य बस स्टैंड से रोजाना करीब डेढ़ सौ बसों का संचालन होता है, इनमें हर रोज करीब चार हजार लोग बसों से यात्रा करते हैं। इसके बाद भी यहां सुरक्षा तो दूर की बात यहां हर रोज शाम होते हुए असामाजिक तत्वों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां आपराधिक किस्म के लोग भी धंधे के आड़ में अन्य संदिग्ध कार्यों में लिप्त हैं। कई दुकानें किराए पर चलाई जा रही हैं, लेकिन इनका वेरीफिकेशन तक कराना उचित नहीं समझा जाता है। यहां जुआ व सट्टा का धंधा भी खूब पनपता है। ऐसे में यहां की सुरक्षा का अंदाजा भी आसानी से लगाया जा सकता है।