ललितपुर। शासन भले ही परिषदीय विद्यालयों की ग्रेडिंग पर जोर दे रहा हो, पर विभागीय अफसर इस मामले में उदासीन बने हुए हैं।
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मौजूदा शैक्षिक सत्र में एक माह की भी ग्रेडिंग नहीं हो सकी है, जिससे बच्चों के शैक्षिक स्तर की सच्चाई सामने नहीं आ पा रही है।
बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित विद्यालयों की शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। शासन ने सतत एवं व्यापक मूल्यांकन कार्यक्रम और आरंभिक पठन कौशल प्रशिक्षण चला रखे हैं। वहीं, कमिश्नर के राममोहन राव का ड्रीम प्रोजेक्ट भी संचालित हो रहा है।
इन कार्यक्रमों से शिक्षा के स्तर में हुए सुधार के लिए हर माह विद्यालयों की ग्रेडिंग का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा हर तीन महीने में गुणवत्ता अनुश्रवण प्रपत्र भरे जाते हैं। इन सब के बाद भी विभागीय अफसर स्कूलों की ग्रेडिंग में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं, जिस कारण बच्चों के शैक्षिक स्तर की हकीकत सामने नहीं आ पा रही है।
हालांकि, अफसरों के निरीक्षण में जरूर बच्चों का शैक्षिक कमजोर मिलता है। इसको लेकर शिक्षक सहमत नहीं हैं। शिक्षकों का कहना है कि निरीक्षण में चंद सवालों के आधार पर बच्चों का शैक्षिक स्तर का आंकलन नहीं किया जा सकता है।
स्कूल ग्रेडिंग से हकीकत सामने आने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन खंड शिक्षा अधिकारियों से आख्या जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान की प्राचार्य को अभी तक प्राप्त नहीं हो सकी है।
स्कूल ग्रेडिंग कराई जा रही है, लेकिन इसकी आख्या प्राप्त नहीं हुई है। इसके पीछे प्रमुख वजह विभागीय कामों की व्यस्तता है। शीघ्र ही ग्रेडिंग रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
- कीर्ति शुक्ला
प्राचार्य (डायट)