ललितपुर। नगर पालिका ने वर्षों पहले सफाई कर्मचारियों के लिए आवास तो बनवा दिए थे, लेकिन पालिका इन आवासों की सुध लेना भूल गई है। उदासीनता के चलते आवास जर्जर हालात में पहुंच गए है, जो कभी भी ढह सकते हैं। कुछ कर्मचारियों ने आवासों पर ताला जड़कर नया ठिकाना चुन लिया है। वहीं, कई लोग जर्जर हो चुकी छतों पर टीन-टप्पड़ व पॉलिथीन डालकर रह रहे हैं।
शहर क्षेत्र में नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों के लिए 40 सरकारी आवास बने हैं। यह आवास किस कर्मचारी को आवंटित किए थे और वर्तमान में यहां कौन निवास कर रहा है, इसकी विभाग ने वर्षों से सुध तक नहीं ली है। यह आवास धीरे-धीरे इतिहास बनते जा रहे हैं। नगर के वार्ड नंबर तीन में स्थित मुहल्ला झांसीपुर (जेल चौराहा) में स्थित मां संतोषी माता मंदिर के सामने नजूल की जमीन पर नगर पालिका ने वर्ष 1952 के करीब विभागीय सफाई कर्मचारियों को रहने के लिए 30 आवासों का निर्माण कराया था, इन आवासों में खपड़ेल वाले दो कमरे व एक खुला बरामदा की सुविधा दी गई थी। इन आवासों में रहने वाले कर्मचारी बताते है कि पिछले तीन दशक से किसी अधिकारी व जनप्रतिनिधियों ने आवासों की बदहाली की ओर अपनी नजर भी नहीं डाली है। जो कर्मचारी आर्थिक तौर पर सक्षम हैं, उन्होंने इनकी मरम्मत खुद ही करा ली है और बरसात के पानी व धूम से बचने के लिए टीनशेड लगवा ली है। लेकिन कई कर्मचारी ऐसे हैं, जो वर्षों पहले उजड़ चुकी खपड़ेल की छत पर पॉलिथीन डालकर जीवन यापन करने को मजबूर हैं।
यही नहीं मुहल्ला झांसीपुरा में ही स्थित पोस्टमार्टम हाउस के पास भी सफाई कर्मचारियों के लिए नगर पालिका ने करीब तीन दशक पूर्व दस आवासों का निर्माण कराया था। इन आवासों की भी स्थिति ऐसी ही है, आवंटन के बाद से अधिकारियों ने इनके रखरखाव की ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।
बिना शौचालय के हैं यह सरकारी आवास
नगर पालिका की शुरू से ही यह जिम्मेदारी रही है कि नागरिकों के लिए शौचालयों की व्यवस्था कराए। लेकिन नगर पालिका द्वारा बनाए इन आवासों में शौचालयों का निर्माण कराने में तत्कालीन नगर पालिका अधिकारियों ने अनदेखी दिखाई है। 40 आवासों में शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है। कुछ लोगों ने अपनी व अपने परिवार के लिए शौचालय का निर्माण करा लिया है, लेकिन गरीब व असमर्थ परिवार आज भी शौच के लिए खुले में जाने को मजबूर हैं।
आज भी बिछा हुआ है खड़ंजा
शहर वासियों को पक्का मार्ग व जल निकासी के लिए नालियों की सुनिश्चित व्यवस्था कराने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है, लेकिन नगर पालिका के ही सफाई कर्मी ही इन सुविधाओं से वंचित बने हुए हैं। सफाई कर्मियों के इन आवासों के लिए आज भी पक्के रास्ते की व्यवस्था नहीं की गई है। यहां के रास्तों पर खड़ंजा बिछा हुआ है। पानी की निकासी के लिए नाली की भी कोई उचित व्यवस्था नहीं है।
जहां तक याद है 30 वर्ष से अधिक का समय बीत गया है, इन आवासों की विभाग द्वारा कोई मरम्मत नहीं की गई है। आवासों की स्थिति काफी बेकार है, इन आवासों में रहने वाले लोग कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं।
- रघुनंदन प्रसाद बाल्मीकि
रिटायर्ड सफाई कर्मचारी
आवासों का बुरा हाल है, दीवारें कभी भी ढह सकती है। कच्ची छतों व दीवारों से बरसात का पानी कमरों के अंदर टपकता रहता है। शौचालय की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
- रेखादेवी
सफाई कर्मी
मेरे कार्यकाल में कर्मियों द्वारा आवासों की मरम्मत की मांग नहीं उठाई गई है। यदि इस तरह की कोई मांग की जाती है, तो प्रशासन व शासन के समक्ष इनकी मांगों को जरूर रखा जाएगा।
राकेश कुमार
अधिशासी अधिकारी नगर पालिका