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Lalitpur News: पुलिस को चकमा देकर सट्टा सरगना पहुंचा ललितपुर, गिरफ्तार

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अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर। छह दिनों से छका रहा शातिर सट्टा सरगना धर्मेंद्र साहू झांसी पुलिस को चकमा देकर ललितपुर जा पहुंचा। शनिवार को ललितपुर पुलिस ने उसे आजादपुरा मोहल्ला से गिरफ्तार कर लिया। उसका छोटा भाई समेत सट्टा खिलवाने वाले आठ गुर्गे भी गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस ने उनके पास से ग्यारह एटीएम कार्ड समेत हिसाब-किताब रखने वाले कई रजिस्टर भी बरामद किए हैं। आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने सभी को जेल भेज दिया।
31 मार्च को सीपरी बाजार, सर्वनगर के प्लेटिनम अपार्टमेंट में चल रहे सट्टेबाज गैंग का भंडाफोड़ हुआ था। पुनावली ग्राम प्रधान जय सिंह उर्फ राजा गुर्जर समेत पांच युवक गिरफ्तार हुए थे। पूछताछ में सरगना के तौर पर नगरा निवासी धर्मेंद्र साहू का नाम सामने आया। उसके बाद से झांसी एसओजी उसे तलाश रही थी। धर्मेंद्र लगातार एसओजी को चकमा देता रहा। चोरी-छिपे ललितपुर जा पहुंचा।
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अपर पुलिस अधीक्षक (ललितपुर) अनिल कुमार के मुताबिक सट्टेबाजों के आजादपुरा मोहल्ले में होने की भनक लगने पर शनिवार रात सदर एवं एसओजी टीम ने लेडियापुरा स्थित मकान में छापा मारा। यहां से धर्मेंद्र साहू समेत उसका भाई आशीष साहू समेत उसके आठ गुर्गों को गिरफ्तार किया गया। इनमें इंदौर निवासी मयंक साहू, औरैया निवासी रोहित करन राजपूत, महरौनी निवासी शीतल सेन, कोतवाली क्षेत्र निवासी नीतेश सेन, ऋषि परिहार, विवेक कुमार निवासी उरई शामिल हैं। इनके पास से दो दर्जन मोबाइल फोन, तीन लैपटाप, 11 एटीएम कार्ड, तीन आधार कार्ड, पांच पासबुक, नौ चेकबुक, सिमकार्ड सहित पांच रजिस्टर बरामद किए। पुलिस टीम में कोतवाल रमेश चंद्र मिश्रा, सदर चौकी प्रभारी अनुराग शर्मा, रोहित सिंह, अंकित कौशिक शामिल रहे।
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इनसेट
पुलिस से बचने के लिए फेस टाइम का करते थे इस्तेमाल
सट्टेबाजी गिरोह चलाने वाला सटोरिया धर्मेंद्र साहू काफी शातिर है। इसी वजह से अक्सर वह पुलिस को भी चकमा दे जाता। पुलिस ने उसके पास से कई आईफोन बरामद किए। आईफोन में उसने फेस टाइम पर अपनी आईडी बनाई हुई थी। पुलिस से बचने के लिए वह फेस टाइम का इस्तेमाल करता था। सट्टा खिलवाने के लिए उसने विदेश से एप बनवाया था। इसकी मदद से देश भर में सट्टा खिलवाता था। कई मोबाइल फोन से यह संचालित होते थे। इसके लिए फर्जी दस्तावेज लगाकर सिम लिया हुआ था। आईडी खोलने के लिए बार कोड के माध्यम से पैसा मंगवाते थे। जीतने वाले को अधिकांशता नकद पैसा भिजवाया जाता था।
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