ललितपुर। शिक्षकों की तैनाती में फर्जीवाड़ा उजागर करने के लिए चल रही जांच में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के डिग्रीधारक शक के दायरे में हैं। इस प्रकरण की जांच एसआईटी (स्पेशल इंवेसटिगेशन टीम) द्वारा की जा रही है। इससे शिक्षकों में खलबली मची है।
बेसिक शिक्षा विभाग के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत अध्यापकों के अभिलेखों को खंगाला जा रहा है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से प्राप्त डिग्रीधारक शक के दायरे में हैं। ऐसे प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक, शिक्षा मित्र व अनुदेशकों के अभिलेखों को देखा जा रहा है। पिछले दिनों जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रामप्रवेश ने खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि इस प्रकरण की जांच एसआईटी द्वारा की जा रही है। निर्देशित किया गया है कि विकासखंड में कार्यरत संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से प्राप्त डिग्री धारक समस्त शिक्षकों की सूची, उनके समस्त अभिलेखों एवं शैक्षिक प्रमाण पत्रों की छाया प्रतियाें सहित दो-दो फोटो कापी सेट कार्यालय में जमा कराए, जिससे कि जांच आगे बढ़ सके।
इसी तरह परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत दिव्यांग अध्यापक (अस्थि बाधित, श्रवण बाधित, दृष्टि बाधित) हैं, उन शिक्षकों की सूचना शासन द्वारा मांगी गई है। उक्त सूची में दिव्यांग अध्यापक के अतिरिक्त यदि कोई दिव्यांग अध्यापक कार्यरत है तो उसका विवरण सूची से मिलान करते हुए निर्धारित प्रारूप पर प्रमाणित कर कार्यालय को उपलब्ध कराएं। इसके अनुपालन में खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा अपने विकासखंड अंतर्गत उक्त सूची के अतिरिक्त अन्य कोई शिक्षक चिह्नांकन के लिए शेष नहीं है। इस प्रक्रिया से शिक्षकों में खलबली मची हुई है।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबंधित सूचना शासन को भेजी जा चुकी है। दिव्यांग शिक्षकों की भी आरंभिक सूूची जांच के लिए पहुंचा दी गई है। दिव्यांग शिक्षकों से संबंधित फाइनल सूची भी शीघ्र भेजी जाएगी। वर्तमान में तैयार सूची का परीक्षण किया जा रहा है।
- रामप्रवेश बीएसए, ललितपुर