ललितपुर। संस्कृत भारती कानपुर प्रांत के तत्वावधान में आनलाइन चल रहे संस्कृत संभाषण वर्ग का समापन हो गया। वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत के बिना भारतीय संस्कृति की कल्पना नहीं की जा सकती है।
संस्कृत भारती कानपुर प्रांत के उपाध्यक्ष और नेहरू महाविद्यालय संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने कहा कि संस्कृत से ही संस्कारों की उत्पत्ति होती है और बिना संस्कार के हम पशु हो जाते हैं। आज जिस तरह की घटनाएं देश में हो रही हैं, उससे हम सभी को यह समझने की आवश्यकता है कि आखिर कमी कहां रह गई है। कमी सिर्फ यह है कि हम अपने बच्चों को संस्कारित नहीं कर रहे हैं। जितनी शिक्षा और जितना ज्ञान विज्ञान संस्कृत में है, उतनी दुनिया की किसी भाषा में नहीं है। आज पूरा विश्व संस्कृत के महत्व को स्वीकार कर रहा है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों में संस्कृत के कई विश्वविद्यालय खुल चुके हैं। कानपुर प्रांत के संघटन मंत्री प्रकाश झा ने कहा कि संस्कृत संभाषण वर्ग की सही सार्थकता तभी है, जब हम संभाषण वर्ग में प्राप्त ज्ञान का सदुपयोग करें। उन्होंने विकास खंड स्तर पर शिविर आयोजित कर लोगों को संस्कृत भाषा सिखाने का आह्वान किया।
संस्कृत संभाषण वर्ग के संचालक जनपद मंत्री डॉ. जगदीश प्रसाद शर्मा ने एकादश दिवसीय संभाषण वर्ग की आख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि इसमें जनपद के 60 लोगों ने पंजीकरण कराया था, जिसमें से 50 लोगों ने नियमित अभ्यास और संस्कृत बोलने का प्रशिक्षण प्राप्त कर संभाषण कला प्राप्त की।
समापन अवसर पर विभाग प्रचार प्रमुख मनोज तिवारी, कार्यकारिणी सदस्य सजन कुमार शर्मा, जिला कार्यवाह आशीष चौबे, जिला बौद्धिक प्रमुख डॉ. हृदय नारायण उपाध्याय, रमेशचंद्र तिवारी, प्रचार प्रमुख भक्तराज, प्रताप नारायण गुप्ता प्रीतम प्रसाद, अन्नपूर्णा शास्त्री, श्रीमती रमा तिवारी संगीता उपाध्याय, शारदा देवी, दीपा देवी, लक्ष्मी देवी, शिरोमणि राजा, पूजा राजपूत, रामेश्वर प्रसाद, विमल, विजय पांडे, अमित साहू, गणेश प्रसाद, सोनम साहू, रामेश्वर प्रसाद, सोनम यादव, मानवी यादव, शिवा यादव, मनोज, वीरपाल उपस्थित रहे। संचालन डॉ. हृदयनारायण उपाध्याय ने किया।