ललितपुर। सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं रुद्रमहायज्ञ आयोजन के अंतर्गत रविवार को चंडी मंदिर स्थित मंगल सभागार में श्रद्धालुओं ने 25 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। चंडी पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने कहा कि आध्यात्मिक विज्ञान में सनातन धर्म की जड़ें हैं। जीवन की समस्याओं का समाधान विज्ञान से और आध्यात्मिक समस्याओं के लिए अविनाशी दर्शनशास्त्र का उपयोग करना चाहिए।
रविवार सुबह श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। दोपहर में पूजन व महारुद्राभिषेक कराया। पार्थिव शिवलिंग का पूजन व महारुद्राभिषेक प्रधान यजमान हरिशंकर साहू ने किया। श्रीरामकथा में कथा व्यास चंद्रभूषण पाठक ने प्रभु श्रीराम जन्मोत्सव का वर्णन किया तो श्रद्धालु भावविभोर हो गए। सभागार जय श्रीराम के जयकारों से गूंज गया।
चंडी पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने कहा कि गीता के अनुसार सनातन का अर्थ, जो सबसे पुराना हो, अग्नि से, पानी से, हवा से, अस्त्र से नष्ट न किया जा सके और वो जो हर जीव और निर्जीव में विद्यमान है। धर्म का अर्थ होता है जीवन जीने की कला। सनातन धर्म की जड़ें आध्यात्मिक विज्ञान में हैं। उन्होंने कहा कि यजुर्वेद के 40वें अध्याय के उपनिषद में ऐसा वर्णन है कि जीवन की समस्याओं का समाधान विज्ञान से और आध्यात्मिक समस्याओं के लिए अविनाशी दर्शनशास्त्र का उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महाभारत के युद्ध में जब अर्जुन अपने ही भाइयों के विरुद्ध लड़ने के विचार से कांपने लगते हैं, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। कृष्ण ने अर्जुन को बताया कि यह संसार एक बहुत बड़ी युद्ध भूमि है, असली कुरुक्षेत्र तो उनके अंदर है। गीता हमें नर से नारायण बनना सिखाती है। गीता त्याग, प्रेम और कर्तव्य का संदेश देती है। श्रीरामचरित मानस की महाआरती मुख्य यजमान बाबू गंधर्व सिंह परिवार ने की। इस मौके पर स्वामी हीरानंद गिरि, सरदार बीके सिंह, अवध बिहारी उपाध्याय, कुंज बिहारी उपाध्याय, राजीव बबेले, अनूप मोदी, गिरीश खरे, डॉ. अनूप श्रीवास्तव, अश्विनी पुरोहित, राहुल शुक्ला, रामकृपाल गुप्ता, संदीप तिवारी, लक्ष्मीनारायण साहू, संतोष साहू, लखन यादव, शत्रुघ्न यादव, सर्वेश्वरगिरि, अमित संज्ञा व संजू खरे आदि उपस्थित रहे।