संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी। कस्बा बांसी में लालजी मंदिर में चल रही श्रीराम कथा में भगवान श्रीराम के विवाह की कथा का रसपान कराया गया। कथा में बारात आगमन, समधी मिलन और जनकपुर की गारी सुनकर श्रद्धालु झूम उठे।
कथा व्यास बृजेश दास महाराज ने कहा कि समधी का अर्थ है जिनकी समान बुद्धि हो। उन्होंने बताया कि महाराज ने कहा कि रामायण में राजा दशरथ और राजा जनक को सम समधी बताया गया है, क्योंकि दोनों के विचार, संस्कार और बुद्धि समान थी। कथा में विवाह के अनेक नेगाचार और व्यंग्य का भी सुंदर वर्णन किया। उन्होंने जनकपुर की महिलाओं द्वारा बारातियों को सुनाई गई गारी भी सुनाई, जिसे सुनकर पूरा पंडाल हंसी और तालियों से गूंज उठा। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीराम की बारात की विदाई तीन माह बाद हुई थी। कथा के दौरान मंदिर परिसर जय सियाराम और जय श्रीराम के जयकारों से गूंजायमान हो उठा।