दरम्या शहर के इक नदी मर गई, बेरुखी आपकी क्या से क्या कर गई। जिसने जीवन दिया था शहर के लिए, माथे पर दाग बदनामी का धर गई। कवि स्वदेश सोनी की यह पंक्तियां शहजाद नदी के मौजूदा हालातों पर सटीक बैठती हैं। शहर के बीचोबीच से निकली शहजाद नदी के किनारे जगह-जगह कूड़े को डंप किया जा रहा है तो नदी के पानी में प्लास्टिक कचरा बह रहा है। इस तरह नदी का पानी पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है जो बीमारी का कारण बनता जा रहा है।
गोविंद सागर बांध से होकर निकली शहजाद नदी का बुरा हाल है। न केवल नदी व उसके आसपास के क्षेत्र पर अतिक्रमण/अवैध कब्जा हो गया है। वहीं, नदी के दोनों ओर के किनारे पर विभिन्न मुहल्लों का कचरा डंप हो रहा है। गोविंदनगर स्थित सहरिया बस्ती का कचरा नदी के किनारे पर डाल दिया जाता है तो यही हाल मुहल्ला नदीपुरा का है। यही नहीं, नालियों का गंदा पानी भी इसी से पहुंच रहा है। बीते वर्षों में शहजाद नदी काफी साफ सुथरी थी। नदी पुल से लड़के छलांग लगाकर नहाते थे। लेकिन जब से नालियों का गंदा पानी व कचरा फेंका जाने लगा तब से शायद ही कोई इसमें नहाते हो। अब तो सुबह शाम होते ही यहां खुले में शौच करने के लिए कतार लग जाती है। हालांकि नगर पालिका परिषद खुले में शौच को बंद करने के लिए अभियान चला रही है। लेकिन, इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदूषित हो चुके पानी का इस्तेमाल सब्जी व अनाज उगाने में हो रहा है, जो मानव की सेहत के लिए ठीक नहीं है। यही पानी आगे चलकर शहजाद बांध में इकट्ठा हो रहा है, जिसे पेयजल के रूप में उपयोग मेें लाया जा रहा है। यदि शहजाद नदी की सफाई पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह दिन दूर नहीं, जब जिले में लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रसित होंगे।
खुले में शौच करने वालों की लगती भीड़
शहजाद नदी में सफाई कर्म व मुहल्ले के लोग कचरा फेंक रहे हैं। मुहल्ले किसी के निर्माण होता है तो उसकी मिट्टी नदी में डलवा दी जाती है। लोगों ने शौचालय बनवा लिए हैं लेकिन शौच खुले में कर रहे हैं। सुबह शाम नदी किनारे खुले में शौच करने वालों की भीड़ लग जाती है। घर से निकलना मुश्किल हो रहा है। दरवाजे पर खड़े होते हैं तो नदी में फैले कचरे से बदबू आती है। वहीं, कई लोगों ने नदी के आसपास कब्जा भी कर लिया है। वहीं, स्ट्रीट लाइट भी नहीं जल रही है। जिससे उसे दोहरी समस्या से जूझ रहा है।
अनीसा बेगम
नदी की सफाई को पैसा हो आवंटित
सुम्मेरा तालाब की सफाई पर नगर पालिका का ध्यान है। शासन से भी पैसा आवंटित हो रहा है लेकिन शहजाद नदी की सफाई नहीं की जा रही है। जबकि नदी में सबसे ज्यादा गंदगी फैली है। नदी का पानी सडांध मार रहा है। जिससे लोग नदी के किनारे खड़े होने से कतराते हैं। जिला प्रशासन शहजाद नदी की सफाई कराए, जिससे कि नदी पुराने रूप में आ सके।
अमित तिवारी
अध्यक्ष,
स्वच्छ ललितपुर-सुंदर ललितपुर जागरुकता अभियान
मंदिर जाने में होती परेशानी
ललितेश्वरी मंदिर का मार्ग शहजाद नदी पुल से होकर गुजरता है। अधिकांश दर्शनार्थी इसी पुल का इस्तेमाल करते हुए मंदिर जाते हैं। इस दौरान नदी में न केवल गंदगी दिखाई देती है बल्कजि दुर्गंध भी उठती है। जिससे लोगों में मानसिक तनाव पैदा हो जाता है। इस नदी को साफ सुथरा बनाने की आवश्यकता है। इससे जिले का काफी बड़ा रकवा सिंचित होता है। इसके बाद भी नदी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। जब दूसरी नदियों को अविरल बनाने की बात हो रही है तो इसमें शहजाद नदी को भी शामिल किया जाए।
आलोक रिछारिया
अध्यक्ष,
प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ललितपुर।
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नदी की सफाई के लिए चले अभियान
नदी का पानी प्रदूषित होने से संक्रमण का खतरा पैदा हो गया है। मानव के साथ जलीय जीव भी सीधे प्रभावित हो रहे हैं। जब तक खुले में शौच, मरे हुए जानवर एवं आसपास के लोग कचरा फेंकना बंद नहीं करेंगे तब तक नदी को साफ सुथरा बनाना बेहद कठिन है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गलियों व सड़कों को साफ किया जा रहा है। इसी तरह शहजाद नदी की सफाई के लिए अभियान चलाया जाए।
प्रबल सक्सेना
प्राइवेट चिकित्सक
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सफाई कर्मी कचरा फेंके तो खींच ले फोटो
नदी में कचरा फेंकने की बात संज्ञान में आई थी। जिस पर सफाई कर्मियों को नदी किनारे कचरा नहीं फेंकने के लिए स्पष्ट हिदायत दे दी थी। यदि कोई सफाई कर्मी अभी भी कचरा फेंकता है तो उसकी फोटो खींच लें, जिससे उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। खुले में शौच के लिए टिगरिंग अभियान एनजीओ की मदद से जल्द ही तालाब एवं नदी किनारों के आसपास रहने वाले मुहल्लों में चलाया जाएगा।
अवनींद्र कुमार
अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद ललितपुर।