ललितपुर। आगामी महीनों में जनपद के बालाबेहट क्षेत्र में प्रदेश का पहला रबर का बांध बनकर तैयार होगा। जनपद में पेयजल व सिंचाई के लिए सबसे जटिल इलाके बालाबेहट में रबर का बांध बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके लिए दक्षिण कोरिया के तकनीकी विशेषज्ञों की मदद जी जाएगी।
27 मई से साउथ कोरिया में वर्ल्ड वॉटर समिट का आयोजन किया जा रहा है, इसमें भाग लेने सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव, प्रमुख सचिव सिंचाई दीपक सिंघल व अधीक्षण अभियंता विनय श्रीवास्तव जा रहे हैं। रबर बांध बनाने में साउथ कोरिया को वर्षों से महारत हासिल है। समिट के दौरान वहां के तकनीकी विशेषज्ञों से रबर बांध निर्माण के लिए मदद मांगी जाएगी।
बालाबेहट में यह बांध सौंर नदी पर बनाया जाएगा। कंक्रीट बांध की तुलना में इसके निर्माण में करीब 40 फीसदी कम लागत आती है। साथ ही इसके निर्माण में भी कम समय लगता है। बालाबेहट में सौंर नदी पर रबर बांध निर्माण को लेकर सभी तैयारियां कर ली गई हैं। बालाबेहट में रबर बांध के निर्माण के बाद इस तकनीक का इस्तेमाल जनपद में दूसरी जगहों पर भी किया जा सकता है।
बताते चले कि देश में पहला रबर तकनीक का बांध आंध्रप्रदेश में बनाया गया था। अब जनपद प्रदेश का पहला रबर बांध होने का गौरव प्राप्त करेगा। बालाबेहट क्षेत्र में पानी की समस्या से निपटारे के लिए लंबे समय से बांध की मांग की जा रही थी। करीब सात-आठ माह पूर्व सिंचाई मंत्री जिले में आए थे, तब उन्होंने रबर तकनीक के बांध के निर्माण की घोषणा की थी। बालाबेहट की भौगोलिक स्थिति व वन क्षेत्र की अधिकता के कारण सिंचाई विभाग के अनुसंधान विंग ने यहां पर रबर का बांध बनाने की संस्तुति की है, जिसको शासन की ओर से हरी झंडी मिल गई है।
क्या है रबर तकनीक बांध?
रबर बांध की तकनीक चीन, आस्ट्रिया और साउथ कोरिया में वर्षों से उपयोग में आ रही है। लेकिन, देश में इस तकनीक का उपयोग सबसे पहले आंध्रप्रदेश के विजयनगरम जिले की झांझावती नदी पर वर्ष 2006 में किया गया था। उस समय इस बांध को बनाने के लिए आस्ट्रिया के तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली गई थी। हालांकि, अब देश में इस तकनीक पर काफी काम हो चुका है। डायरेक्ट्रेट ऑफ वाटर मैनेजमेंट भुवनेश्वर के इंजीनियरों ने दो रबर बांधों का निर्माण स्वदेशी तकनीक पर किया है। रबर बांध का निर्माण छोटी नदियों पर किया जाता है। रबर बांध में स्पिल-वे का निर्माण नहीं किया जाता है। कंक्रीट की नींव पर एक रबर ब्लाडर ही बांध व स्पिल-वे दोनों का काम करता है। इस ब्लेडर में हवा, पानी या दोनों का मिश्रण भरा जाता है। इस ब्लेडर को एथेलिन प्रोपाइलिन डाइन मोनोमर रबर से बनाया जाता है। यह ब्लेडर बुलेट प्रूफ होता है। इसको जरूरत के मुताबिक बड़ा या छोटा किया जा सकता है। इसी तकनीक के कारण ही रबर बांध में स्पिल-वे की आवश्यकता नहीं होती है।
बालाबेहट में जल्द ही रबर बांध का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा, इसकी तकनीक में साउथ कोरिया के इंजीनियरों से मदद ली जा सकती है। रबर बांध तकनीक बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।
- इंजी. विनय श्रीवास्तव
अधीक्षण अभियंता, सिंचाई निर्माण मंडल झांसी