ललितपुर। जनपद में दो वर्ष में हुए दुष्कर्म के मामलों को लेकर प्रदेश शासन अंजान है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में शासन की रिपोर्ट ताजा आंकड़ों से बिलकुल अलग है। इसमें बलात्कार के मामले शून्य दर्शाए हैं।
महिला अपराधों में दिन-प्रतिदिन वृद्धि हो रही है। खासतौर पर गरीब, निरक्षर व ग्रामीण महिलाओं के साथ ज्यादती हो रही है। इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए न्यायिक प्रक्रिया भी अमल में लाई जा रही है। यदि फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायालय की बात करें तो न्यायालय द्वारा बलात्कार, अपहरण, छेड़खानी जैसे मामलों में महिलाओं को न्याय दिलाते हुए नौ मामलों में सजा सुनाई गई है।
वहीं, ताजा आंकड़ों पर नजर डाली जाए, तो वर्ष 2015 में 10 और वर्ष 2016 में अब तक बलात्कार के तीन मामले दर्ज किए गए हैं। महिला उत्पीड़न के मामलों में कार्य कर रही लखनऊ की संस्था आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में जनपद ललितपुर में शासन द्वारा दो वर्ष में धारा- 376 में बलात्कार की संख्या शून्य और यौन उत्पीड़न से संबंधित मामलों में पास्को एक्ट के तीन मामले होना बताए गए हैं। ऐसे में शासन की रिपोर्ट ताजा आंकड़ों से बिलकुल उलट दर्शाई जा रही है।