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रॉक फाॅस्फेट : पांचवें ब्लॉक की नीलामी पूरी, जल्द गुलजार होंगी खदानें

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अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर। मड़ावरा तहसील क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में रॉक फॉस्फेट पाए जाने पर इसे पांच ब्लॉकों में विभाजित कर नीलामी प्रक्रिया अपनाई जा रही थी। शुक्रवार को पांचवें और अंतिम ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया पूर्ण हो गई। यह ब्लॉक मैमको माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड सिंहभूम, झारखंड को दिया गया है। जल्द ही यहां रॉक फॉस्फेट का दोहन शुरू हो जाएगा।
वर्ष 1984 से 87 के बीच हुए सर्वे में यहां रॉक फॉस्फेट प्रचुर मात्रा में पाया गया था। इसके बाद खनिज विकास निगम ने खदान का संचालन किया था, लेकिन बाद में खदानों को बंद कर दिया गया। सरकार ने इन खदानों को एक बार पुन: प्रारंभ करने के लिए सर्वे कराया। मड़ावरा के गांव सौंरई में रॉक फॉस्फेट का भंडार वर्ष 2021 में मिला था।
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221 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 16 लाख मिलियन टन रॉक फॉस्फेट है। भूतत्व खनिकर्म विभाग ने इस क्षेत्र में पांच खंड तैयार किए थे, जिसमें चार खंडों की नीलामी हो चुकी है। अब पांचवें खंड की निविदा पूर्ण हो चुकी है। जिला खनन अधिकारी अमितोष वर्मा ने बताया कि पांचवां खंड धौरीसागर बड़वार के मध्य है। इसका कुल क्षेत्रफल 5.05 वर्ग किलोमीटर है। इस ब्लॉक में रॉक फॉस्फेट कुल 0.74 मिलियन टन आंका जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका कंपोजिट लाइसेंस दिया गया है।
पत्थर की जांच कर कई विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी होने के बाद ही दोहन कार्य प्रारंभ किया जाएगा। अपर जिलाधिकारी अंकुर श्रीवास्तव ने कहा कि यह खनिज क्षेत्र को नया आयाम देगा।
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उर्वरक निर्माण के लिए उपयुक्त है फॉस्फेट
यहां उपलब्ध रॉक फास्फेट का भंडार उर्वरक निर्माण के लिए उपयुक्त है। जैविक खाद बनाने के लिए गोबर तथा रॉक फॉस्फेट का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी मदद से रासायनिक क्रिया करके सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) तथा डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) रासायनिक उर्वरक तैयार किए जाते हैं। खनिज फास्फेट का सर्वाधिक प्रयोग फास्फेट उर्वरकों के निर्माण में होता है।
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मड़ावरा के बड़वार में स्थित पांचवें ब्लॉक की निविदा प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। जल्द ही यहां रॉक फॉस्फेट का दोहन शुरू होगा। इससे लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।-अक्षय त्रिपाठी, जिलाधिकारी।
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