ललितपुर। पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए वन क्षेत्र की जमीन पर सड़क निर्माण की बाधा दूर हो गई है। अब वन भूमि पर निर्माण का अनापत्ति प्रमाण पत्र पाने के लिए केंद्र सरकार के चक्कर नही लगाने पड़ेंगे, बल्कि शासन ने वन क्षेत्र की सड़कों के निर्माण के लिए वन विभाग को लोक निर्माण विभाग के सहयोग से सड़क निर्माण करने का आदेश जारी कर दिया है। वन विभाग ने लोक निर्माण विभाग से सड़कों का एस्टीमेट मांगा है, जो शासन को भेजा जाएगा। स्वीकृति के बाद वन क्षेत्र की जमीन पर सड़क निर्माण कराया जाएगा।
जनपद में पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। नाराहट क्षेत्र के पटना-पारौल गांव से सात किलोमीटर दूर पांडव वन, चंडी मंदिर, दूधई का सूर्य़ं मंदिर, दूधई स्थित नृसिंह मंदिर, बंट का च्यवन ऋषि आश्रम, जखौरा क्षेत्र में करकरावल जल प्रपात, मदनपुुर क्षेत्र में धार्मिक व पर्यटन महत्व का स्थल पचमढ़ी, धौर्रा क्षेत्र में श्रीरणछोरधाम मंदिर, देवगढ़ स्थित मुचकुंद व बौद्घ गुफाएं आदि वन क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं, जहां तक पहुंचने के लिए वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सड़कों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह केंद्र सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलना था।
कुछ दिनों पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समीक्षा बैठक में पर्यटन स्थलों तक वन विभाग की भूमि पर सड़क निर्माण नहीं होने का मामला उठा था। इस पर मुख्यमंत्री ने वन क्षेत्रों की परियोजनाओं व विकास से संबंधित सड़कों के निर्माण की अड़चनों को दूर करते हुए वन विभाग को लोेक निर्माण विभाग के सहयोग से सड़क निर्माण के आदेश जारी किए थे। इसको लेकर वन विभाग के अधिकारियों ने वन क्षेत्र की जमीन पर पर्यटन क्षेत्रों तक बनाई जाने वाली सड़क निर्माण का एस्टीमेट लोेक निर्माण विभाग से मांगा है।
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मुख्यमंडी की समीक्षा बैठक में वन क्षेत्र की जमीन से पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए सड़क निर्माण का मुद्दा उठा था। इसके बाद शासन ने लोक निर्माण विभाग को सड़क निर्माण के लिए आदेश दिया। लोक निर्माण विभाग ने एस्टीमेट मांगा है, जो शासन को भेजा जाएगा।
- डीएन सिंह, डीएफओ।