सीएम आदित्यनाथ योगी झांसी में बृहस्पतिवार को आ रहे हैं, इसके चलते ललितपुर के निवासियों में भी शहर को संवारे जाने की उम्मीद जाग उठी है।
शहर के मुख्य मार्गों समेत विभिन्न गली-मुहल्लों की छलनी हो चुकी सड़कें आखिर कब सुधरेंगी। नगर के संकरे और जर्जर पुल जहां हादसों को न्यौता दे रहे हैं, जो वर्षों से सुधार व चौड़ीकरण की बाट जोह रहे हैं। वहीं मध्यप्रदेश को जोड़ने वाली सड़कों का चौड़ीकरण का कार्य अधूरा है।
नगर के जर्जर हो चुके मुख्य मार्ग स्टेशन रोड पर पूर्व मंत्री भगत राजा बुंदेला, पूरन सिंह बुंदेला, पूर्व सांसद सुजान सिंह बुंदेला, पूर्व विधायक रामकुमार तिवारी, पूर्व विधायक फेरनलाल अहिरवार, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष डा. सतीश कुमार सुड़ेले, रमेश खटीक के अलावा सावरकर चौराहा के पास पूर्व मंत्री डा. अरविंद जैन के आवास हैं। वहीं, स्टेशन रोड के पास ही प्रदेश के श्रम सेवा योजना राज्यमंत्री मन्नू कोरी भी निवास करते हैं। इसके साथ ही सीडीओ, एडीएम, सीएमओ के अलावा कई सिविल जज व सीओ सिटी का आवास भी इसी जर्जर मार्ग पर है। इसी मार्ग पर कई बैंक व अधिकारियों के कार्यालय भी हैं। जिला पंचायत, सेल टैक्स, इनकम टैक्स और रेलवे स्टेशन भी इसी मार्ग पर स्थित हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि शहर के इतने वीआईपी स्टेशन मार्ग की हालत ही इतनी जर्जर हो चुकी है, कि हर कोई वाहन चलाते समय रोड की खराब हालत होने पर जिम्मेदारों को कोसता ही नजर आता है। सोशल मीडिया पर भी यह जर्जर सड़क आए दिन बहस का मुद्दा बनती है, लेकिन जिम्मेदार इस बहस में न पड़ कर मौन रहना ही उचित समझते हैं।
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की दरकार
ललितपुर। जिला अस्पताल में उचित व्यवस्था नहीं है। यहां पर करोड़ों रुपए की लागत से ट्रामा सेंटर की स्थापना करा दी गई है, लेकिन इसका पूरा लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है। पर्याप्त स्टाफ तैनात नहीं किया गया है। वर्तमान में करोड़ों रुपये की यह बिल्डिंग केवल हड्डी विशेषज्ञ चिकित्सकों की ओपीडी मात्र बनकर रह गई है।
-आईसीयू ईकाई भी बनी शोपीस
ट्रॉमा सेंटर व जिला अस्पताल भवन के मध्य बने भवन में बीते दो-तीन वर्ष पूर्व करोड़ों रुपये की लागत से आईसीयू यूनिट स्थापित की गई है। इस यूनिट में सभी सुविधाएं हैं, लेकिन स्टाफ व विशेषज्ञों के अभाव में यह आईसीयू यूनिट व मशीनरी दो वर्षों से धूल फांक रही है।
- कैंसर का उपचार तो दूर जांच भी नहीं
जिला अस्पताल में कैंसर का उपचार तो दूर की बात है यहां पर जांच की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में स्थानीय लोगों को समय पर कैंसर की बीमारी का पता नहीं लग पाता है और जब तक बीमारी का पता चलता है तो काफी देर हो चुकी होती है। जनपद में कैंसर से मरने वाले लोगों की संख्या भी दिन व दिन बढ़ती जा रही है।
- वर्न वार्ड भी नहीं हो सका शुरू
जिला अस्पताल में करीब तीन-चार वर्ष पूर्व आग से झुलसने वाले लोगों को भर्ती करने के लिए अलग से एसी वाला वर्न वार्ड स्थापित किया गया था। इस वार्ड को बनाने में लाखों रुपये की धनराशि व्यय की गई थी, लेकिन अब तक इस वार्ड की सुविधा जले हुए मरीजों को नहीं मिल पा रही है। इसके पीछे भी चिकित्सीय अधिकारी स्टाफ न होने की बात कहते आ रहे है।
शिक्षा के लिए तत्कालीन मुख्य सचिव ने मांगे थे प्रस्ताव
ललितपुर। आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी जिले के विद्यार्थियों को माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिए समीपवर्ती जिलों के शैक्षिक संस्थानों में निर्भर रहना पड़ता है। प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव भी इस समस्या का समाधान नहीं कर सके। अब सबकी निगाहें नई सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों पर लगी हुई हैं।
जिले के गठन के बाद से शिक्षण संस्थानों की कमी बनी हुई है। खासकर राजकीय हाईस्कूल, इंटर कालेजों की कमी है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत हाईस्कूल, इंटर कालेजों को खोला जा रहा है। योजनांर्गत कई स्कूलों का उच्चीकरण किया गया है। जिसके तहत अभी तक 31 हाईस्कूल खोले जा चुके हैं। वहीं, सात राजकीय इंटर कालेज विभिन्न जगहों पर पहले से संचालित हो रहे हैं। इस विस्तार के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में राजकीय इंटर कालेजों की कमी महसूस की जा रही है। बीते माहों में प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने जिले के भ्रमण के दौरान कालेज खोलने के लिए प्रस्ताव मांगा था। जिससे जनपदवासियों में कालेज खुलने की आश जग गई थी। तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक श्याम प्रकाश यादव ने तत्परता दिखाते हुए सर्वे कराया।
यहां है कालेज की जरूरत
राजकीय इंटर कालेज पारौन, कैलगुवां, धौर्रा, मगरपुर, बालाबेहट, पवा, पूराकलां में कालेज खोलने का प्रस्ताव है। इसी तरह राजकीय हाईस्कूल दैलवारा, थनवारा, वस्त्रावन, पठा, गौना, डोंगराकलां, धौरीसागर, दावनी स्कूल को उच्चीकृत कर इंटर कालेज खोलने की मांग प्रस्तावित है।
जाहिर की अनभिज्ञता
मेरे पूर्व के समय का मामला है, इसलिए उन्हें नवीन इंटर कालेज खोलने के प्रस्ताव की जानकारी नहीं है।
आरपी वर्मा
डीआईओएस ललितपुर।
जिले में नहीं हैं उच्च तकनीकी संस्थान
जिले में इंजीनियरिंग कालेज, नर्सिग कालेज, एमबीए, एमसीए, राजकीय बालिका महाविद्यालय का भी अभाव है।
हवाई पट्टी का नहीं हुआ जीर्णोद्घार
सिवनी में हवाई पट्टी बनी हुई है। जिसका भी अभी तक जीर्णोद्घार नहीं हो सका है। जिससे उसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। यदि इसे उपयोग में लाया जाए तो इसका लाभ जनपद को मिल सकेगा।
सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट अधर में
स्वच्छता को प्राथमिकता देने वाली सरकार में जिले का कचरा इधर-उधर फेंका जा रहा है। जिससे स्वच्छ ललितपुर बनाने की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।
पेयजल व सिंचाई को सुदृढ़ बनाने की जरूरत
जिले की पाइप पेयजल योजना का हाल किसी से छिपा नहीं है। कई गांवों में पाइप पेयजल योजना लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही हैं तो नगर की जलापूर्ति के लिए बिछाई गई पाइप लाइनों में कई जगह लीकेज बना हुआ है। वहीं, जनपद में पर्याप्त बांधों की स्थापना हो गई है लेकिन, नहरों का जाल गांव-गांव तक नहीं बिछ पाया है। जबकि केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने हर खेत तक पानी पहुंचाने का वायदा चुना के दौरान किया था।
कांजी हाउस की दरकार
जिले में एक भी कांजी हाउस नहीं है। इस कारण जानवर शहर और हाइवे की सड़कों पर घूमते रहते हैं। इससे आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। नगर पालिका द्वारा कांजी हाउस के लिए बजट भी पास हो चुका है, लेकिन अभी तक जमीन नहीं मिल पाई है। इस कारण कांजी हाउस का काम ठंडे बस्ते में चला गया है। स्थानीय लोगों की प्रमुख मांग कांजी हाउस की भी है।