जखौरा। पीतल की बढ़ी कीमतों ने स्थानीय मूर्ति एवं शिल्प उद्योग को गहरा झटका दिया है। हाथ से बनने वाली पीतल की मूर्तियां, रथ-मॉडल, हाथी-घोड़े और खिलौनों की लागत बढ़ गई है, जबकि बाजार में मांग घट रही है। कारीगरों के पास काम सीमित है, लेकिन मुनाफा लगभग खत्म होने के कगार पर है। जखौरा क्षेत्र में कारीगरों को महंगाई के कारण दुकानदार अब कम ऑर्डर दे रहे हैं। लोगों का रुख सस्ते प्लास्टिक और मशीन से बनने वाले सामान की तरफ ज्यादा हो रहा है। इससे घरेलू आमदनी पर भी सीधा असर पड़ रहा है। बढ़ती लागत के बीच कारीगर दाम बढ़ाने से भी हिचकते हैं, उन्हें डर बना हुआ है कि ग्राहक पूरी तरह दूर हो जाएगा।
ऋण सुविधा व कच्चे माल पर मिले आंशिक राहत : शिल्पकारों का सुझाव है कि कच्चे माल पर आंशिक राहत, आसान ऋण सुविधा, मार्केटिंग में सहायता और शिल्प मेलों व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री के अवसर दिए जाएं। उनका मानना है कि समय रहते सहारा मिल जाए तो यह पारंपरिक कला फिर से रफ्तार पकड़ सकती है। संवाद