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ग्राम प्रधान आरक्षण की आपत्तियां खारिज

Thu, 15 Oct 2015 12:37 AM IST
ललितपुर।
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ललितपुर। जिले में ग्राम प्रधानों के आरक्षण को लेकर दर्ज कराई गई 150 से अधिक आपत्तियां विचार करने के योग्य नहीं पाई गईं। जिला मजिस्ट्रेट ने जिला पंचायत राज विभाग कार्यालय में प्राप्त सभी 156 आपत्तियां खारिज कर दी हैं। इससे शिकायत कर्ताओं को मायूसी हाथ लगी है।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जहां जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के लिए निर्वाचन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, वहीं जिले की 416 ग्राम पंचायतों का आरक्षण तय किया जा रहा है। इस क्रम में पिछले दिनों ग्राम प्रधानों के आरक्षण की अन्नतिम सूची प्रकाशित की गई थी। इसमें सामान्य वर्ग के लिए 134, महिला के लिए 63, अनुसूचित जाति के लिए 57, अनुसूचित जनजाति के लिए 12, पिछड़ा वर्ग महिला के लिए 39, अनुसूचित जाति महिला के लिए 31 और अनुसूचित जनजाति महिला के लिए छह ग्राम प्रधान की सीटें आरक्षित की गई थीं।

 इसके विरोध में विभिन्न ग्राम सभाओं से आपत्तियां दर्ज की कराई गई थीं। किसी ने मतदाताओं की संख्या को आधार मानते हुए आरक्षण बदलने की वकालत की थी तो किसी ने पिछले आरक्षण का हवाला देते हुए सीट बदलने की मांग की थी। बहुत से लोगों ने ग्राम सभा में वर्षों से आरक्षण नहीं होने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय ने प्राप्त सभी आपत्तियों के सभी पहलुओं पर विचार किया। लेकिन, प्रस्तावित आरक्षण बदलने की स्थिति नहीं बनी। 
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जिला मजिस्ट्रेट डा. रूपेश कुमार ने आपत्तियों को तार्किक नहीं मानते हुए सभी आपत्तियों को निरस्त कर दिया, जिससे आरक्षण बदलवाने के चक्कर में घूम रहे शिकायतकर्ताओं को गहरा झटका लगा है। कई लोगों के तो सीट नहीं बदलने से चुनाव लड़ने के सपने चकनाचूर हो गए हैं। 

यहां से आई थीं आपत्तियांब्लाक महरौनी से 30, बार से 21, बिरधा से 35, जखौरा से 27, मड़ावरा से 21 और तालबेहट से 22 आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। लेकिन, इनमें से एक भी आपत्ति विचार योग्य नहीं पाई गई और उन्हें निरस्त कर दिया गया है।
यह है आरक्षण तय करने की प्रक्रियाआरक्षण तय करने में ग्राम सभा की जनसंख्या के प्रतिशत और वर्ग को अवरोही क्रम में लिया गया है। इस क्रम में सबसे पहले अनुसूचित जन जाति, फिर अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, महिला व अनारक्षित वर्ग को रखा गया है। 
शिकायतकर्ताओं ने अपनी आपत्ति में जनसंख्या को आधार नहीं बनाया, जिससे उनकी आपत्ति खारिज कर दी गई। इसके बाद तय हुए आरक्षण को शासन में भेज दिया गया है।- दिनेश प्रसाद, डीपीआरओ ललितपुर।
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