ललितपुर। बाबूजी ज्ञानचंद अलया का मृत्यु महोत्सव श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन नया मंदिर में आयोजित किया गया। इस मौके पर शांति विधान, भावांजलि और श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस दौरान बाबू जी को याद किया गया। उनके जीवन पर आधारित पुस्तक ‘कहानी जिंदादिली की’ का लोकार्पण भी किया गया।
सर्वधर्म भावांजलि सभा में मुख्य अतिथि सदर विधायक रमेश चंद्र कुशवाहा और नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। वक्ताओं ने बाबूजी को मृदुभाषी और सकारात्मक सोच का धनी बताते हुए कहा कि उनका समग्र जीवन समाजसेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने सदैव समाज को जोड़ने का कार्य किया। शहर पेश इमाम हाजी अब्दुल अलीम ने कहा कि सभी धर्मों और मजहब में सद्कार्यों की प्रधानता है, इसी से ही मानव की पहचान होती है। कार्यक्रम संयोजक अजीज कुरैशी ने कहा कि बाबूजी के गले में खुदा की कुदरत थी। वे बोलते थे तो रोशनी दिखाई देती थी।
सर्वधर्म सभा में मंगलाचरण द्वारा नीलांजना अलया मुंबई ने बाबूजी के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। इस मौके पर सरदार गुरुवचन सिंह बिल्ले, रूप सिंह, कांशीराम साहू, डा. दीपक चौबे, राघवेंद्र सिंह, गोकुल चंद सरोज, राजेंद्र रजक, हरवीर सिंह अरोरा, प्रो. भगवत नारायण शर्मा, रामस्वरूप देवलिया, धर्मेंद्र गोस्वामी, अक्षय दिवाकर, राजेंद्र चौधरी, मुन्नालाल सठयाना, डा. आरपी श्रीवास्तव, संतोष शर्मा, अनिल जैन अंचल, मोहम्मद शकील, मोहम्मद हबीब, अजय जैन, रवि चुनगी, रविंद्र पाठक, गोविंद व्यास आदि ने विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि ने पुस्तक ‘कहानी जिंदादिली का’ लोकार्पण किया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डीएफओ वीके जैन और उत्तम चंद राकेश रहे। अध्यक्षता समाजसेवी डा. निर्मल चंद जैन ने की।
इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, वर्द्धमान सौंरया, वासुदेव सिंधी, कंछेदी लाल सिंघई, सुनील जैन, सुनील सरल, डा. वीके जैन, डा. राकेश जैन, अरविंद जैन, डा. अक्षय टड़ैया, राजेंद्र जैन, प्रदीप जैन, ओमप्रकाश शास्त्री आदि प्रमुख रहे।