संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जायद की फसलों में पीला मोजेक से बचाव के लिए किसान लगातार निगरानी करें। किसी भी तरह का लक्षण दिखे तो तत्काल दवाइयों का छिड़काव करें।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी राजीव कुमार भारतीय ने बताया कि मूंग, उड़द की फराहा में पीला चित्तवर्ण रोग (पीला मोजेक ) का प्रकोप हो सकता है। पीला मोजेक दिखाई देने पर नियंत्रण के उपाय अपनाएं। पीला मोजेक व माहू कीट के नियंत्रण के लिए फसल में डाईमिथोएट 30 प्रति ईसी की एक लीटर मात्रा अथवा ईमीडाक्लोप्रिड 17.8 प्रति एसएल की 250 से 300 एमएल छिड़काव करें। फंफूदीनाशक रसायन कार्बेंडाजिग 12 प्रतिशत व मेंकोजेब 639 प्रतिशत एक किलोग्राम मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टयेर में छिड़काव करें।
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खरीफ की फसल के लिए खेत करें तैयार: जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि खरीफ फसलों की बुवाई का समय आने वाला है। किसान मई-जून में खेत की गहरी जुताई करें। रबी फसलों की कटाई के बाद डंठल न जलाएं, बल्कि जुताई कर इसे भूमि में मिला दें। रबी फसलों की कटाई के बाद खेत की गहरी जुताई आगामी खरीफ फसल के लिए अनेक प्रकार से लाभकारी होती है। मृदा की जलधारण क्षमता बढ़ती है, जो फसलों की बढ़वार के लिए उपयोगी होती है। मृदा के अंदर छिपे हुए हानिकारक कीड़े मकोड़े, उनके अंडे, लार्वा, प्यूपा एवं खरपतवारों के बीज नष्ट हो जाते हैं। जमीन में वायु संचार बढ़ जाता है, जो लाभकारी सूक्ष्म जीवों के वृद्धि एवं विकास में सहायक होता है।
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कीट व रोग की सूचना देकर पाएं निदान: फसलों में रोग संबंधी समस्या के समाधान के लिए सहभागी फसल निगरानी व निदान प्रणाली (पीसीएसआरएस) संचालित है। किसान 9452247111 व 9462257111 नंबर पर अपना पंजीयन नंबर, नाम, ग्राम व ब्लॉक के साथ फसल में लगने वाले रोग का नाम, लक्षण, फोटो सहित विवरण भेजें। 48 घंटे में समाधान मिलेगा।