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Lalitpur News: बदहाल रास्तों से देवी मंदिरों में पहुंचना मुश्किल

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ललितपुर। नवरात्र में श्रद्धालुओं की आस्था प्रबल है,लेकिन देवी मंदिरों तक जाने वाले रास्ते उबड़-खाबड़ होने से पहले दिन ही परेशानियों का सामना करना पड़ा। आलम यह है कि महाभारत कालीन प्राचीन वैरावट धाम आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां मां वैरावट और भगवान शिव के दर्शन के लिए सालभर श्रद्धालु आते हैं। नवरात्र और महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है लेकिन सड़क पर गड्ढे, कीचड़ और उबड़-खाबड़ रास्ते मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। पैदल चलने वालों के साथ ही दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भी संभलकर निकलना पड़ता है। हैरत की बात तो यह है कि पालिका प्रशासन ने सड़कों की मरम्मत नहीं की,जिसका खामियाजा श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ रहा है। पेश है कुछ सड़कों का आंखों देखा हाल....।
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दृश्य-1
सड़क पर गड्ढे और कींचड़ से बढ़ती मुश्किलें
प्राचीन वैरावट धाम धाम तक पहुंचने वाले मुख्य मार्ग की स्थिति बेहद खराब है। सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे होने और कीचड़ फैलने से आवागमन कठिन हो गया है। बारिश के दौरान रास्ते की स्थिति और खराब हो जाती है। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों के लिए संतुलन बनाए रखना मुश्किल होता है, जबकि पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। सड़क की बदहाली के कारण धाम तक पहुंचने में अधिक समय लगता है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए यह समस्या लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है।
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दृश्य -2
चंडीमाता धाम पहुंचने की राह नहीं आसान
गांधीनगर प्रथम में स्थित सुप्रसिद्ध प्राचीन चंडीमाता मंदिर धाम में पहुंचने की राह आसान नहीं है। मोहल्ले की सड़कें अमृत योजना के तहत डाली गईं पेयजल पाइप लाइनों के लिए खोद दीं गईं थीं। जो कि अभी तक भरी नहीं गई। कई बार मंदिर पहुंचने को घर से निकली महिलाएं एवं बच्चे इन उबड़-खाबड़ रास्तों में फंसकर गिर जाते हैं। स्थानीय लोगाें ने कई बार जल निगम एवं कार्यदायी संस्था से शिकायत भी की, किंतु मार्ग अभी तक नहीं सुधर सके। अब नवरात्र में अधिक संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचेंगे ऐसे में दुर्घटनाओं का अंदेशा बना हुआ है।
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दृश्य-3
ललितेश्वरी मंदिर पहुंचने को निर्माणाधीन पुल बना बाधा
शहर का सबसे प्राचीन एवं ऐतिहासिक धाम मां ललितेश्वरी मंदिर जहां साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। खास तौर पर नवरात्र के अवसर पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और मां का आशीर्वाद लेते हैं। मान्यता है कि यहां आने पर मांगी गईं मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। लेकिन शहजाद नदी पर बन रहा पुल बाधक बना हुआ है। श्रद्धालुओं को पहुंचने में सर्विस रोड का सहारा लेना पड़ रहा है। जो कि पर्याप्त नहीं है, पुल से होकर केवल दो पहिया वाहन ही निकलते हैं, चार पहिया वाहनों के लिए बड़ी समस्या पैदा हो गई है।
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वैरावट धाम पहुंच मार्ग कच्चा एवं कीचड़युक्त है। दो पहिया वाहनों का पहुंचना भी कठिन है। बारिश के मौसम में यहां तक पहुंचना किसी जोखिम से कम नहीं है। यदि यह मार्ग पक्का बन जाए, तो मंदिर में पहुंचना आसान होगा।-पूनम सिंह परमार
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प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्र के दौरान परिवार सहित वैरावट धाम पहुंचते हैं, वहां पर हवन पूजन के साथ कन्याभोज भी कराते हैं, लेकिन मार्ग न होने से बड़ी मुश्किल से यहां तक पहुंचते हैं, कुछ लोग रास्ता सही नहीं होने के कारण बहुत कम ही पहुंचते हैं।-मनीष पंथ

वैरावट धाम में प्राचीन मंदिर है, यहां पांडवों की कुल देवी विराजमान हैं। रास्ता नहीं होने कारण यहां पहुंचने में भारी दिक्कतें उठानी पड़तीं हैं। कई बार प्रशासन से सड़क बनवाने की मांग की गई, लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया।-विनय जोशी
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नगर पालिका क्षेत्र में जो सड़कें हैं उनकी मरम्मत का काम जल्द शुरू होगा।-दिनेश कुमार विश्वकर्मा, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद
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