ललितपुर। ग्राम महेशपुरा में मिट्टी परीक्षण शिविर एवं किसान संगोष्ठी में किसानों के खेतों की मिट्टी के सौ से अधिक नमूने लिए गए। अब इनके कार्ड बनाकर दिए जाएंगे।
अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार मिश्र ने कहा कि हम सब धरती माता की सेहत का ध्यान रखें। रासायनिक खादों और कीटनाशकों का प्रयोग कम से कम करने का संकल्प लें। मिट्टी परीक्षण करके कार्ड में खेत की मिट्टी के संबंध में पूरी जानकारी दी जाएगी। इसी कार्ड में दी गई जानकारी के अनुसार खेत में उर्वरक का प्रयोग करें। रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों के अंधाधुध प्रयोग के कारण जमीन बंजर होती जा रही है।
उन्होंने कहा कि हम पहले रागी, मडुवा, कठिया गेहूं, ज्वार, बाजरा की खेती करते थे, इसमें पानी कम लगता था। खाद भी नहीं देना पड़ता था। गोबर की खाद एवं गोमूत्र के प्रयोग से खेती होती थी। अब अत्याधिक खादों का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरकता कम हो रही है। उप निदेशक कृषि संतोष कुमार ने कहा कि अब तक दुनियां की 33 प्रतिशत जमीन बंजर हो चुकी है। भोजन का 95 प्रतिशत हिस्सा जमीन मेें पैदा किया जाता है। रसायनिक खादों एवं कीटनाशकों के रूप में लगातार डाला जा रहा जहर हमारे भोजन को विषयुक्त कर रहा है। हम नए- नए रोगों से ग्रसित होते जा रहे हैं। सड़े गोबर की खाद में ट्राईकोडर्मा मिलाकर खेत में छिडकाव करने से जमीन की उर्वरकता बढती है।
साईं ज्योति संस्था के सचिव अजय श्रीवास्तव ने कहा कि हमारा अभियान है कि महिलाओं को भी किसान का दर्जा मिले। बडी संख्या में तारा अक्षर कार्यक्रम से जुड़ी नवसाक्षर बहनों में अपनी- अपनी जमीन का मिट्टी परीक्षण के लिए सैंपल दिया है। साथ ही मृदा परीक्षण के महत्व को समझा है।
इस दौरान मृदा परीक्षक अशोक कुमार ने सौ से अधिक खेतों की मिट्टी के सैंपल एकत्रित किए। विश्व मृदा दिवस पर हुए कार्यक्रम में ग्राम महेशपुरा के अलावा ग्राम दावनी, बम्हौरी, बुढ़वार, ककरुआ, कुआंतला, पटौरा कलां, पटौरा खुर्द रजवारा, कल्याणपुरा आदि गांवों की महिलाओं ने प्रतिभाग किया।
इस अवसर पर कृषि विभाग के प्राविधिक सहायक पवन कुमार, सतवंत, लवकुश भूषण, उपेंद्र सिंह, संजीव, प्रवीण पाटीदार, ललित कुमार के अलावा तारा अक्षर से उमा, गीता, सीमा, शिवानी, अंजुम, सीमा, जलेव कुुंवर, शगुन बाई, शांति, नन्हीं, रमन शर्मा, अजय मिश्रा, राजेश राय, कमलेश कुशवाहा, पुष्पेंद्र यादव, राघवेंद्र पांडेय, नंदलाल, परवेज, शंकर सिंह, पवन आदि मौजूद रहे। संचालन महेश रिछारिया ने किया।