रंगपंचमी पर ग्राम बुढ़वार में कार्यक्रम।
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डोंगरा खुर्द (ललितपुर)। ग्रामीण और कस्बा क्षेत्रों में रंगों का पर्व होली बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर लोगों ने एक दूसरे को रंग गुलाल लगाए एवं एक दूसरे के गले लगकर गिले शिकवे दूर किए। पांच दिनों तक चलने वाले रंगों के इस महापर्व का रंग पंचमी के साथ समापन हो गया।
चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी को रंग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन होली के ठीक पांचवें दिन पड़ता इसलिए इसे रंग पंचमी के नाम से जाना जाता है । इस दिन खेली गई होली देवताओं और राधा कृष्ण को समर्पित मानकर खेली जाती है। इस मौके पर लोग एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर रंगों के पर्व होली को मनाया। पूर्णिमा की रात में हुए होलिका दहन के साथ ही अगले दिन से होली खेलने की परंपरा है। परमा के दिन से शुरू हुए रंगों के पर्व होली का पंचमी के दिन समापन हो गया। रंग पंचमी के दिन राख पंचमपुर में प्रसिद्ध सिद्ध बाबा मंदिर में धूूमधाम से मनाया गया। इसके साथ ही गांव गांव में मंदिरों मे रंग पंचमी पर रंग गुलाल भांग भेंटकर उत्साहपूर्ण ढोल नगाड़े के साथ मनाया गया।
रंग पंचमी के दिन जनकपुरी रामजी पधारे और वहां मिथलापुर के प्रजाजनों के साथ चारो भाइयों ने होली खेला। सतयुग में होलिका दहन के बाद आज के दिन देवताओं ने प्रह्लाद के बचने की खुशी में विशेष उल्लास के साथ अबीर गुलाल से एक दूसरे का सम्मान बढ़ाते हुए यह पर्व मनाया।
- टीकाराम दुबे
यह परंपरा सनातन से चली आ रही है। हर गांव में राधाकृष्ण मंदिरों में रंग पंचमी के दिन राधाकृष्ण को रंग, गुलाल, भांग भेंटकर कर ढोल नगड़ियों के साथ फागों का गान होता है। रंग गुलाल लगाकर भेदभाव दूर करते हैं।
- रामकंकन शास्त्री, पुजारी राजमंदिर डोंगराखुर्द
रंगपंचमी पर राख पंचमपुर के सिद्ध बाबा मंदिर में दर्शन को जुटे श्रद्धालु।- फोटो : LALITPUR
राजमंदिर डोगरा खुर्द में फाग गाते फगवारे।- फोटो : LALITPUR
ंग पंचमी पर डोगरा खुर्द के राज मंदिर में सजाए गए भगवान कृष्ण और राधा।- फोटो : LALITPUR