ललितपुर। 24 घंटे की बारिश ने कई जगहों पर जलभराव की स्थिति पैदा कर दी है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में आवागमन ठप पड़ा रहा। इसके कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। किसानों की फसलें भी बर्बाद हो गईं।
गोविंद सागर बांध के गेट बंद होने के बाद शहजाद बांध पर से 16 घंटे बाद आवागमन शुरू हो सका। जामनी बांध के गेट खुले रहने के कारण शुक्रवार से छपरट पुल पर आठ फुट तक पानी रहा, जिस कारण महरौनी-ललितपुर मार्ग करीब 24 घंटे बंद रहा। छपरट पुल से शनिवार दोपहर जलस्तर कम होने पर यातायात शुरू हो सका। महरौनी, मड़ावरा, बानपुर आदि कस्बों में जलभराव के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
भारी बारिश के कारण ग्राम पंचायत भारौन के ग्राम बिजौरी, प्याऊ, ग्राम पंचायत धौर्रा में बेतवा नदी व नारायणी नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण किसानों सोयाबीन, उर्द की फसल नष्ट हो गई। शनिवार को ग्रामीणों ने डीएम को शिकायती पत्र सौंपकर नष्ट हुई फसल का मुआवजा दिलाने की मांग की है। इस अवसर पर जयराम रजक, धीरज सिंह, पृतपाल सिंह, वीर सिंह यादव, रामेश्वर प्रसाद मिश्रा, बबीता देवी मिश्रा आदि मौजूद रहीं।
वहीं, ब्लॉक बार के ग्राम सेमरा डांग के ग्रामीणों ने डीएम को शिकायती पत्र सौंपा। ग्रामीणों ने बताया कि शुक्रवार को आयी भारी बारिश व आंधी के कारण गांव में कई पेड़ गिर पड़े। इससे कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। पेड़ गिरने से गांव की बासौदा बाली, उसकी पुत्री राजकमारी घायल हो गईं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है। इस अवसर पर सुंदरपाल सिंह, सुनील, फूलचंद्र, पूरन, गजू, कैलाश, रामदीनल, बल्लू आदि उपस्थित रहे।
भारी बारिश से पांच डिग्री गिरा तापमान
24 घंटे की लगातार बारिश के करण तापमान में भी पांच डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है। 18 अगस्त को जनपद का तापमान 30 डिग्री दर्ज किया गया था। 19 व 20 अगस्त को जनपद का तापमान गिरकर 25 डिग्री पहुंच गया। वहीं, न्यूनतम तापमान 22 डिग्री तक पहुंच गया।
सैकड़ों किसानों की फसलें डूबी
24 घंटे की लगातार बारिश के चलते बानपुर कस्बे में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी का सामना उन किसानों को करना पड़ा, जिन्होंने तालाबों की खाली पड़ी भूमि पर फसल बोई थी। लगातार हुई बारिश के कारण तालाब लबालब हो गए और किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न होकर नष्ट हो गई। पुतली घाट पर करीब 20 फुट पानी ऊपर से निकलने के कारण आवागमन पूरी तरीके से बंद रहा।
कचनौंदा बांध के गेट खुले होने के कारण गईयाघाट पुल पर भी पानी आ गया और जिस कारण से यातायात बंद रहा। किसानों ने जामनी व जमड़ार नदी के किनारों पर खरीफ की फसल बोई थी। लेकिन भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया और जिस कारण से पूरी फसलें जलमग्न हो गई। सबसे ज्यादा नुकसान बानपुर, वीर, खाकरौन,सुनवाहा व चकौरा गांव के किसानों को हुआ है।
डोंगरा तालाब के अस्तित्व पर खतरा
तहसील पाली के अंतर्गत ग्राम ़डोंगराखुर्द से ग्राम पटना तक पसरे तालाब का अस्तित्व खतरे में है। सिंचाई विभाग की अनदेखी का शिकार ग्राम डोंगराखुर्द के तालाब से ग्रामीणों ने पत्थर निकाल लिए थे। लेकिन सिंचाई विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। डोंगरा तालाब से करीब 15 सौ एकड़ खेती की सिंचाई होती थी, लेकिन अब मात्र तीन सौ एकड़ जमीन की सिंचाई हो रही। यह तालाब देखरेख के अभाव में बेकार हो गया है।
तालाब के पत्थर निकाल लिए जाने से इसकी नींव कमजोर हो गई है। तीन दिन से लगातार हो रही बारिश से तालाब फटने की संभावना बन गई है। शुक्रवार को तालाब के ऊपर से पानी निकल गया है, जिससे तालाब के बंदी पर नाली कट गई। ग्रामीणों ने तालाब को खतरे में देखकर खुद ही नाली खोद कर पानी की निकासी कराई। तालाब फटने से करीब एक दर्जन गांव बाढ़ की में आ सकते हैं। इस तालाब की मरम्मत करीब 40 साल से नहीं हुई है। तालाब करीब एक किलोमीटर से ज्यादा लंबा है।
ग्रामीणों की मांग पर एसडीएम पाली प्रदीप कुमार और तहसीलदार अरुण कुमार श्रीवास्तव ने तालाब पर जाकर मुआयना किया। सिंचाई विभाग के जेई एसबी शर्मा ने बताया कि तालाब के जीर्णोद्घार के लिए 11 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया। बजट मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि तालाब की स्थिति काफी खराब है। इस मौके पर हरीराम दुबे, राजाराम तिवारी, लबीराजा, चंद्रभान सिंह, जितेंद्र राजा, वीर सिंह मौजूद रहे।