रामराजा मंदिर के पुजारी पंडित पं. हरिओम शास्त्री।
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ललितपुर। पुष्य रवि नक्षत्र को व्यापारिक दृष्टिकोण से लाभकारी माना गया है। हालांकि यह व्यावसायिक दृष्टिकोण से सर्वोत्तम तो है ही, कुछ कार्यों के करने से धनवर्षा भी होती है। इस बार यह सात नवंबर को भोर में चार बजकर 26 मिनट से शुरू होगा जो रविवार की सुबह चार बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा।
विद्वानों के अनुसार अगर भवन निर्माण की नींव रखी जाए, गाय खरीदी जाए तो अकूत धन लाभ भी मिलता है। इससे धन की कभी क्षति नहीं होती और मां लक्ष्मी घर में सदैव अपनी कृपा बनाए रखती हैं। रामराजा मंदिर के पुजारी पंडित हरिओम शास्त्री का कहना है कि भारतीय संस्कृति में ग्रह, नक्षत्र और राशियों का महत्वपूर्ण स्थान है। यह प्रत्येक 27 दिन में एक बार 24 घंटे के लिए आता है। इस बार यह सात नवंबर को भोर में चार बजकर 26 मिनट से शुरू होगा जो रविवार की सुबह चार बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा। उनका मानना है कि कर्क राशि को स्पर्श करने के कारण पुष्य नक्षत्र अति महत्वपूर्ण हो जाता है। इस दिन व्यापार शुरू करने, घर की नींव डालने, गाय की खरीदारी करने और उसकी सेवा करने से अक्षय धन की प्राप्ति होती है जो जन्म जन्मांतर तक टिका रहता है। पुष्य नक्षत्र में ओरछा की महारानी गणेश कुंवर श्री रामराजा को अयोध्या से पैदल लेकर आई थीं और उन्हें ओरछा में विराजमान किया था। इसके चलते बुंदेलखंड में इसका आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इसी कारण बुंदेलखंड के लोग दीपावली के पूर्व पड़ने वाले पुष्य नक्षत्र के मुहूर्त को श्रेष्ठतम मुहूर्त मानते हैं।