ललितपुर। बाल दिवस के दिन भी बाल पुस्तकालय का ताला खोलने की जहमत नहीं उठाई गई। बच्चों में साहित्य के प्रति रुचि पैदा करने के उद्देश्य से वर्षों पहले राजकीय जिला पुस्तकालय के परिसर में बाल पुस्तकालय की स्थापना की गई थी। इसमें प्राइमरी शिक्षा से संबंधित सामग्री के साथ विभिन्न प्रकार का साहित्य उपलब्ध है। इसके अलावा बच्चों के मनोरंजन के लिए खेल सामग्री है। इसके बाद भी शहरी बच्चे इस पुस्तकालय से दूरियां बनाए हुए हैं। इस कारण पुस्तकालय में रखी सामग्री धूल खा रही है। कर्मचारियों ने पुस्तकालय का ताला खोलना ही बंद कर दिया है। इंटरनेट के युग में बच्चों को साहित्य पढ़ना रास नहीं आता है, इस बात को मान भी लिया जाए तो विभाग की ओर से उन्हें यहां लाने के लिए क्या प्रयास किए गए इस सवाल पर कोई संतोष जनक जवाब नहीं मिलता है।
पुस्तकालय के जिम्मेदार लोगों का कहना है कि राजकीय पुस्तकालय में ही बच्चों के लिए कार्नर बना दिया गया है, जिसमें भी बच्चे नहीं आते हैं। हालांकि, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा में भाग्य आजमाने वाले युवा यहां बैठकर अपनी तैयारी कर रहे हैं। विभागीय अफसरों ने बाल पुस्तकालय में बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अब तक कोई ठोस उपाय नहीं किए हैं, जिससे न तो बच्चे स्वयं पहुंच रहे हैं और न ही उनके अभिभावक उन्हें लेकर पहुंच रहे हैं। इससे बाल पुस्तकालय की स्थापना की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।
इंटरनेट के जमाने में बच्चों को कंप्यूटर, लेपटॉप व स्मार्टफोन चलाना रास आता है। वह मोबाइल पर कई तरीके के खेल खेलना पसंद करते हैं। जिससे वह बाल साहित्य से दूर होते जा रहे हैं, साथ ही इतिहास व समृद्घ संस्कृत से दूर बने हुए हैं। तमाम बच्चे अभी स्वामी विवेकानंद, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और महाराणा प्रताप जैसे वीरों के बारे में नहीं जानते हैं। बल्कि लूडो और कैरम खेलना पसंद करते हैं।
पॉ पेट्रोल, पेप्पा पिग, थॉमस एंड फ्रेंड्स, स्पाइडरमैन गेम खेलना पसंद करते हैं। वहीं, टीवी पर कार्टून छोटा भीम, मोटू पतलू, डब्ल्यू बबलू, मिकी मॉउस, मिस्टर बीन आदि कार्यक्रम से चिपके रहते हैं।
जिला पुस्तकालय का संचालन विधिवत किया जा रहा है। अभी पंजीकरण का कार्य चल रहा है और नवीन सदस्य भी बनाए जा रहे हैं। इसी कैंपस में चिल्ड्रन कार्नर संचालित है। इसमें बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए प्रचार- प्रसार किया जा रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षक के माध्यम से विद्यालयों के प्रधानाचार्यो को पत्र लिखा जाएगा, ताकि विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चे संचालित पुस्तकालय के प्रति जागरुक हो सकें।
- कमलेश कुमार
प्रभारी पुस्तकालय अध्यक्ष
राजकीय जिला पुस्तकालय
----
बाल पुस्तकालय को व्यवस्थित संचालित किया जाएगा। इसका प्रचार- प्रसार किया जाएगा। इसमें बुद्घिजीवी वर्ग व प्रधानाचार्यो की मदद ली जाएगी। पुस्तकालय में बच्चों का साहित्य उपलब्ध है।
- रामशंकर
जिला विद्यालय निरीक्षक