ललितपुर (ब्यूरो)। आर्यिका पूर्णमति माताजी ने कहा कि अपने जीवन को सुधारने के लिए अनंत अवसर तो मिले, लेकिन लोगों ने उन्हें यूं ही गवां दिया। अपने आहार की शुद्धि को भूलकर व्यक्ति दूषित खान-पान में जुटा है, जिससे उनके विचार भी दूषित हो रहे हैं।
श्री क्षेत्रपाल मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिकाश्री ने कहा कि प्रभु और गुरु की ओर दृष्टि श्रद्धा की होती है। गुरु स्वयं अपना अनुभव शिष्यों में बांटकर अनेकानेक पुण्य का संचय कराते हैं। उन्होंने कहा कि कर्मों से चेतन को बचाना है, कि कहीं चेतन में पाप कर्म प्रवेश तो नहीं कर रहे हैं।
पुण्य कर्मों को बढ़ाना है, तभी जीवन का कल्याण है। आर्यिकाश्री को शास्त्र भेंट शिखर चंद, सुभाष चंद किसलवास परिवार और डा. चंद्रकला पाटनी द्वारा किया गया। दीप प्रज्ज्वलन दिलीप कुमार नौगामा बांसवाडा व विजय काला सनावद ने किया। इनका सम्मान जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, महामंत्री डा. अक्षय टडैया, प्रदीप जैन सतरवांस, मुकेश सराफ और सतीश नजा ने किया। धर्मसभा में मंगलाचरण मधु खजुरिया ने करते हुए आर्यिकाश्री के प्रति भावांजलि अर्पित की।