वन विभाग जंगलों को हरा-भरा बनाने तक ही सीमित नहीं रहेगा। अब विभागीय अफसर समुदाय का सहयोग लेते हुए जिले के खाली पड़े सार्वजनिक परिसरों में भी पौधरोपण कराएंगे। इसके लिए शासन ने मनरेगा के तहत मुख्यमंत्री सामुदायिक वानिकी योजना बनाई है। इस प्रोजेक्ट को जिला स्तर पर अंतिम रूप दिया जा रहा है।
74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जिले के जंगल को हरा-भरा बनाने के लिए हर साल लाखों पौधे रोपित किए जाते हैं, लेकिन इस अभियान में सार्वजनिक परिसर हरे भरे होने से छूट जाते हैं। शासन ने इसे इसके लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण योजना के तहत मुख्यमंत्री सामुदायिक वानिकी योजना तैयार की है। इसके अंतर्गत जिले में सड़क/ नहर किनारे, मुक्तिधाम, खेल मैदान, विद्यालय, छात्रावास, ग्राम समाज की भूमि पर पौधे लगाए जाएंगे। इससे पहले गड्ढे खोदे जाएंगे। उपजाऊ मिट्टी व खाद डालकर गड्ढे तैयार किए जाएंगे। इन गड्ढों में पौधरोपण होने पर उनकी सुरक्षा का इंतजाम किया जाएगा। कहीं ट्रीगार्ड, कंटीली झाड़ी/ बांस तो कहीं खाईं खुदा करके रोपित पौधों को सुरक्षा प्रदान की जाएगी। सामुदायिक पौधरोपण के लिए उपलब्ध भूमि एक हेक्टेयर से अधिक है तो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से एक यूनिट मान ली जाएगी। एक हेक्टेयर से क्षेत्रफल अधिक होने पर पूरे क्षेत्र में सुरक्षा खाई बनवाई जाएगी। परियोजना की डीपीआर (डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति देने के लिए ग्राम सभा अधिकृत होगी। यदि सिंचाई विभाग की भूमि पर पौधरोपण कराया जाता है तो उनसे पहले अनापत्ति ली जाएगी। पौधे मृत होने की दशा में नया पौधा लगाया जाएगा। यही नहीं, प्रति यूनिट एक पौधरक्षक की व्यवस्था की जाएगी जो साइकिल पर पीने/केन को रखकर पौधों की सिंचाई के लिए काम करेगा। शर्त यह है कि पौधरक्षक संबंधित ग्राम का निवासी होकर मनरेगा का जाब कार्डधारी होना चाहिए। परियोजना की वर्षवार लागत तय की जाएगी। इसमें पांच साल तक पौधे की रखवाली करने की योजना है। इसकी क्रियान्वयन एजेंसी वन एवं वन्य जीव विभाग को बनाया गया है। परियोजना की अवधि पूर्ण होने पर इसे ग्राम सभा को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। परियोजना के प्राप्त लाभ पर ग्राम सभा का अधिकार होगा। अब वन विभाग के अफसर शासन की गाइड लाइन के आधार पर इसका प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं।
इन पौधों का होगा रोपण
सड़क किनारे आम, इमली, जामुन, महुआ, नीम, सहजन, अर्जुन, पीपल बरगद, नहर एवं ड्रेन किनारे शीशम, आम, इमली, जामुन, नीम, सहजन, अर्जुन, पीपल, बरगद, सामुदायिक स्थल पर आम, जामुन, नीम, आंवला, नीबू, अमरूद, सहजन, बेर, पीपल, बांस जैसे पौधे रोपे जाएंगे।
हर साल पौधों की गणना कराएगी ग्राम सभा
ग्राम सभा प्रतिवर्ष जीवित पौधों की गणना कराकर अपनी स्टाक पंजीकरण में प्रविष्टि करेगी। पर्यवेक्षण के लिए प्रतिवर्ष ग्राम सभा को प्रति परियोजना पांच हजार रुपये का भुगतान सामग्री मद में किया जाएगा। प्रथम वर्ष के अंत में वर्षा ऋतु के आगमन तक जीवित पौधों की संख्या अस्सी प्रतिशत, द्वितीय वर्ष के अंत में ऋतु आगमन तक जीवित पौधों की संख्या नब्बे प्रतिशत, तृतीय वर्ष के अंत तक वर्षा ऋतु के आगमन तक जीवित पौधों की संख्या पंचानवें प्रतिशत, चतुर्थ एवं पांचवें वर्ष के अंत में वर्षा ऋतु के आगमन तक जीवित पौधों की संख्या शत प्रतिशत होने का लक्ष्य रखा गया है। यदि दर्शाई मात्रा से कम पौधे होने की दशा में प्रत्येक वर्ष की अंतिम किश्त स्वत: शून्य हो जाएगी।
स्थल चयन की हो रही कार्रवाई
प्रोजेक्ट के लिए स्थल चयन की कार्रवाई चल रही है। इसमें रेंज अफसरों से भी सूचना मांगी गई है। प्रोजेक्ट को जल्द ही अंतिम रूप देते हुए शासन को भेज दिया जाएगा।
गोविंद शरण, प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी प्रभाग