ललितपुर। जनता की सुरक्षा करने वाले पुलिस कर्मी व उनका परिवार स्वयं ही असुरक्षित जिंदगी जीने को मजबूर हैं। अमर उजाला ने सोमवार को पुलिस लाइन और कचहरी मार्ग पर सिपाहियों के लिए बने सरकारी आवासों की स्थिति का जायजा लिया। तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। यहां जलापूर्ति के लिए तीन साल पहले बनी पानी की टंकी अब तक चालू नहीं हो पाई है। वहीं, रखरखाव के अभाव में दीवारों का प्लास्टर टूटने लगा है। इसी तरह की अन्य परेशानियों से सिपाहियों के परिवार जूझ रहे हैं।
पुलिस लाइन में पीडब्लूडी कार्यालय की ओर सिपाहियों को रहने के लिए आठ आवासीय कालोनी बनी हैं। एक कालोनी में आठ आवास हैं। यहां करीब 64 सिपाही परिवार के साथ रहते हैं। वर्षों पूर्व बनी इन कालोनियों की स्थिति बदतर हो गई है। यहां जलापूर्ति के लिए तीन साल पहले बनाई गई पानी की टंकी अब तक चालू नहीं हो सकी है। दीवारों में जगह-जगह दरार पड़ चुकी है, चौथी मंजिल का पानी दीवारों से रिस-रिस कर कमरों में आ रहा है। कई आवासों की छतों से पानी टपकता रहता है।
यही स्थिति कचहरी मार्ग पर बने पुलिस आवासों की है, यह आवास भी काफी पुराने हैं। यहां पर करीब तीन दर्जन आवास हैं। इन सभी आवासों में बारिश का पानी दीवारों व छतों के सहारे अंदर आ जाता है। प्लास्टर टूट कर गिरने लगा है। सफाई भी न होने से संक्रमित बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ गई है। इन आवासों में रहने वाले पुलिस कर्मियों के परिवार बदहाली की जिंदगी काटने को मजबूर हैं।
नसीब नहीं हुई पक्की सड़क
पुलिस लाइन परिसर व अन्य स्थानों पर बनी पुलिस आवासों को बने कई साल हो गए हैं। इनमें करीब एक हजार पुलिस कर्मी रहते हैं। पुलिस लाइन परिसर में स्टेशन मार्ग से कचहरी मार्ग की ओर जाने वाला ही मुख्य मार्ग केवल पक्का है। इसके इलावा आवासों की ओर जाने वाला रास्ता वर्षों से कच्चा ही है। कचहरी मार्ग पर बने पुलिस आवासों की भी यही स्थिति है। यहां पर कुछ जगहों पर सड़क के नाम पर पत्थर बिछे हुए हैं, इसके अलावा कालोनी में कहीं पर भी पक्का रास्ता नहीं बना हुआ है।