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बुंदेलखंड में अवैध खनन पर वैध का ठप्पा

Tue, 02 Aug 2016 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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mining, jhansi hindi news - फोटो : demo
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कपिल नायक
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ललितपुर। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा अवैध खनन के संबंध में जांच का आदेश जारी करने के बाद पूरे बुंदेलखंड के खनिज कारोबारियों से लेकर अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। देश की सबसे बड़ी ऑडिट संस्था कैग द्वारा जारी वर्ष 2014 और 15 की रिपोर्ट में भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आ चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों की मिलीभगत से बुंदेलखंड के ललितपुर, झांसी, जालौन, महोबा, बांदा और चित्रकूट जनपदों में खदानों से अवैध खनन कर शासन को करोड़ों रुपयों का चूना लगाया गया है। सबसे बड़ा घपला तो वैध खदानों से पट्टा पाए कारोबारियों ने किया है। खदानों से दस साल में बिना अनुमति के अरबों रुपयों का खनिज निकाल कर बेच दिया गया। इसकी रायल्टी भी अदा नहीं की गई। कई खदानों में बिना माइनिंग प्लान पास कराए करोड़ों रुपये के खनिज को ठिकाने लगा दिया गया।
 शासन को अवैध खनन के जरिए चूना लगाने का काम वर्षों से जारी है, जबकि देश की सबसे बड़ी ऑडिट संस्था कैग द्वारा समय-समय पर अपनी रिपोर्टों द्वारा बुंदेलखंड के जिलों में अवैध खनन का ब्यौरा मय आंकड़ों के संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया गया, लेकिन इन रिपोर्ट पर कभी गौर नहीं किया गया। कैग की इन रिपोर्ट में सबसे हैरानी करने वाला तथ्य यह निकल कर सामने आया है, कि बुंदेलखंड के जिलों में अवैध खनन तो हो रहा है, लेकिन सबसे बड़ा गोरखधंधा वैध तरीके से पट्टा पाईं खदानों में हुआ है।
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वैध खदानों में पिछले दस सालों में अरबों रुपये का खनिज बिना अनुमति के निकाल लिया गया, इसमें अधिकारियों की मिलीभगत रही। किसी भी खदान के आवंटन के समय एमएम 1 प्रपत्र के जरिए खदान मालिक माइनिंग प्लान को स्वीकृत कराता है। माइनिंग प्लान में तय होता है कि खदान से कितना खनिज निकाला जा सकता है। बुंदेलखंड में माइनिंग प्लानों को धता बताते हुए अरबों रुपए का खनिज गैर कानूनी तरीके से निकाल लिया गया। ऐसा नहीं है कि संबंधित जिलों के खनिज विभाग को इसकी जानकारी नहीं हुई, क्योंकि बिना माइनिंग प्लान स्वीकृत हुए और माइनिंग प्लान में तय मात्रा से अधिक खनन होने के बाद भी परिवहन के लिए एमएम 11 प्रपत्र विभाग द्वारा जारी होते रहे हैं। इससे साबित होता है कि इस खेल में अधिकारी भी कम जिम्मेदार नहीं हैं।

क्या है माइनिंग प्लान
खनिज विभाग के मिनरल कंसेशन रूल 1960 की धारा 22-ए के तहत लीज आवंटित होने के बाद एमएम 1 प्रपत्र के साथ माइनिंग प्लान को पेश करना होता है। भूगर्भ शास्त्री द्वारा तैयार इस माइनिंग प्लान में खदान की भौतिक स्थिति व कितना खनन किया जाएगा, इसकी पूरी जानकारी होती है। खनिज निदेशालय माइनिंग प्लान की जांच करने के बाद इसको स्वीकृति देता है। माइनिंग प्लान में दर्शाई गई मात्रा से ज्यादा खनन करने के लिए खनिज कारोबारियों द्वारा दोबारा माइनिंग प्लान स्वीकृत कराना पड़ता है। बुंदेलखंड के जिलों में माइनिंग प्लान को दरकिनार करके अवैध खनन किया गया।


दो साल में 50 करोड़ का अवैध खनन
कैग की रिपोर्ट वर्ष 2014 में बताया गया कि बुंदेलखंड के तीन जिलों ललितपुर, झांसी व महोबा की 12 खदानों में 50.33 करोड़ रुपए का अवैध खनन किया गया। झांसी में पांच खदानों में खनिज विभाग की ओर से माइनिंग प्लान स्वीकृत करते हुए 10,8000 क्यूबिक मीटर सैंड स्टोन खनन की अनुमति दी गई, लेकिन खदान मालिकों ने नियमों को दरकिनार कर माइनिंग प्लान के सापेक्ष 59,9270 क्यूबिक मीटर का अधिक खनन कर लिया। इससे खनिज विभाग को 16.48 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ललितपुर जनपद में दो खदानों को 51 हजार क्यूबिक मीटर पत्थर खनन की अनुमति दी गई, लेकिन इन दोनों खदानों से 2 लाख 62 हजार 245 क्यूबिक मीटर पत्थर का अधिक खनन किया गया। इससे शासन को 4.89 करोड़ रुपए के राजस्व की हानि हुई। वहीं, महोबा में चार खदानों में 96 हजार क्यूबिक मीटर पत्थर की अनुमति दी गई थी, लेकिन इन खदानों से 6 लाख 16 हजार 100 क्यूबिक मीटर अधिक निकाल लिया गया। इससे शासन को 15.77 करोड़ रुपए की चपत लगी। महोबा की एक अन्य खदान ने बिना माइनिंग प्लान के ही 4 लाख 28 लाख 950 क्यूबिक मीटर पत्थर का खनन कर लिया गया। इससे 13.19 करोड़ रुपए के राजस्व की हानि हुई।


बिना माइनिंग प्लान के करोड़ों का खनन
बुंदेलखंड के तीन जिलों में बिना माइनिंग प्लान के खदान संचालित करते हुए 40.61 करोड़ रुपए का खनिज निकाल लिया गया। कैग रिपोर्ट-2015 चित्रकूट, झांसी व ललितपुर जिलों में वर्ष 2005 से वर्ष 2015 तक इन तीनों जिलों में खदानों का आवंटन तो करा लिया गया, लेकिन इन खदानों के माइनिंग प्लान स्वीकृत नहीं कराए गए। तीनों जिलों की 28 खदानों से जमकर खनन किया गया और शासन को केवल 8.12 करोड़ रुपए की रायल्टी दी गई। इससे शासन को 40.61 करोड़ रुपए की चपत लगी। चित्रकूट की चार खदानों से 18,504 सेमी पत्थर निकाल कर उसका परिवहन किया गया। इन खदान मालिकों ने केवल 11,19,456 रुपए की रायल्टी जमा की। नियमों के मुताबिक इन खदानों से शासन को 55.97 लाख रुपए अतिरिक्त रायल्टी देय बनती है। चित्रकूट की चार अन्य खदानों से ग्रेनाइट गिट्टी 48,968 सेमी. निकालकर बेची गई। शासन को रायल्टी  28,02, 710 रुपए अदा हुई। इन चार खदानों से शासन को 1.88 करोड़ रुपये और रायल्टी बनती है। झांसी जिले में गिट्टी की पांच खदानों से 4,23,797 सेमी गिट्टी निकलकर शासन को केवल 3, 49, 99, 396 रुपए की रायल्टी अदा की गई। इन खदानों से शासन को 17, 49, 96, 980 रुपए का घाटा हुआ है। झांसी की पत्थर की दस खदानों से 2,39,950 सेमी पत्थर निकालकर 1,82,17, 500 रुपए रायल्टी अदा की गई। इन खदानों पर शासन की 8,14,17, 500 रुपए की देयता बनती है।
ललितपुर की पांच खदानों से ग्रेनाइट, सैंडस्टोन की कुल 5,835 सेमी. मात्रा निकाली गई। इसकी रायल्टी 71, 65, 285 रुपए अदा की गई। इन खदानों पर 3, 58, 26, 425 रुपए रायल्टी की देयता बनती है।


एक साल में अवैध तरीके से 56 करोड़ की बालू निकाली
बुंदेलखंड के पांच जिले बांदा, चित्रकूट, जालौन, झांसी व ललितपुर में अप्रैल 2013 से मार्च 14 तक जमकर बालू का अवैध खनन कर शासन को 56.73 करोड़ रुपए का चूना लगाया गया। बांदा में दो बालू की खदानों से एक साल में 42,900 क्यूबिक मीटर बालू निकाली गई, जिसकी रायल्टी 32, 17, 500 रुपए अदा की गई। इन खदानों से शासन को 1, 60, 87, 500 रुपए का नुकसान हुआ। चित्रकूट में चार खदानों से 1,49,428 क्यूबिक मीटर बालू का खनन कर 1,12, 07,100 रुपए रायल्टी अदा की गई। इन खदानों से 5, 60, 35,500 रुपए का नुकसान हुआ। जालौन में 12 खदानों से 59,523 क्यूबिक मीटर बालू निकाल कर 47, 23, 21,125 रुपए का नुकसान पहुंचाया गया है। इन खदानों से केवल 9, 44, 64, 225 रुपए रायल्टी अदा की गई। झांसी में दो खदानों से 55,350 क्यूबिक मीटर बालू निकाल कर 41, 51, 250 रुपए रायल्टी अदा की गई। इन दोनों खदानों से शासन को 2, 07, 56,000 रुपए का नुकसान हुआ। ललितपुर में 4 खदानों से 5600 क्यूबिक मीटर बालू का खनन कर 4.20 करोड़ रुपए रायल्टी जमा की गई। शासन को 29, 8100,550 रुपए की चपत लगी। इन सारी खदानों की लीज आवंटित की गई थी, लेकिन खदान मालिकों ने माइनिंग प्लान से ज्यादा मात्रा में बालू का खनन किया। खनिज विभाग भी माइनिंग प्लान के सापेक्ष से ज्यादा एमएम 11 प्रपत्र खदान मालिकों को जारी करता रहा।
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हर बार की बचाने की कोशिश
खनिज विभाग ने कैग की हर रिपोर्ट पर नियमों का सहारा लेकर अवैध खनन करने वालों को बचाने की कोशिश की। कैग ने वर्ष 2014 की रिपोर्ट में बताया कि बुंदेलखंड में माइनिंग प्लान से ज्यादा खनन होने पर खदान मालिकों से रायल्टी वसूलने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को जुलाई 2013 में ऑडिट के दौरान निर्देश दिए थे। इस पर खनिज विभाग की ओर से नियमों का हवाला देते हुए कहा गया कि एक बार खदान की लीज होने के बाद खदान मालिक मनमाफिक खनन कर सकता है। इसपर आपत्ति जताते हुए कैग ने जवाब दिया था कि उत्तर प्रदेश सरकार की खनिज नियमावली की धारा 22 ए के तहत खदान मालिक केवल माइनिंग प्लान में तय मात्रा के अनुसार ही खनन कर सकता है। कैग द्वारा नियमों के जरिए आपत्ति जताने के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने कोई जवाब देना मुनासिब नहीं समझा। वर्ष 2015 की रिपोर्ट में कैग ने पिछले वर्षों में प्रदेश में हुए खनिज संपदा की लूट का खुलासा किया तो सरकार व खनिज विभाग ने कैग रिपोर्ट पर ही सवालिया निशान लगा दिए। ऑडिट के दौरान सितंबर 2014 में कैग द्वारा सरकार व खनिज विभाग को खनन के संबंध में पत्र भेजा। खनिज विभाग ने यह माना कि कई खदानें बिना माइनिंग प्लान के संचालित हैं, कई खदानों से माइनिंग प्लान में स्वीकृत मात्रा से ज्यादा खनन कर लिया गया है, लेकिन खनिज विभाग ने कार्रवाई करने से साफ इंकार कर दिया।
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