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बैंक की गलती से सात हजार किसानों को नहीं मिलेगा बीमा क्लेम

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ललितपुर। प्राकृतिक आपदाओं से राहत के लिए चलाई गई योजना का किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसी ही स्थिति वर्ष 2019 में नष्ट हुई खरीफ की फसल के बीमा क्लेम भुगतान की है। बैंकों द्वारा 7,151 ऋणी किसानों के खाते से फसल बीमा के नाम पर प्रीमियम राशि तो काट ली, लेकिन इसका डाटा बीमा कंपनी के पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया, इससे यह किसान अब बीमा क्लेम की राशि से वंचित हो गए हैं।
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प्रधानमंत्री ने किसानों को आपदाओं से फसलों के नष्ट होने पर आर्थिक सहायता देने के लिए फसल बीमा योजना शुरू की है। इसमें किसानों को अपनी फसल का बीमा कराना होता है। फसलों का बीमा दो प्रकार से होता है। गैर ऋणी किसान अपनी फसल से संबंधित दस्तावेजों के साथ बीमा कंपनी को सीधे प्रीमियम राशि देकर बीमा करा सकतेे हैं। इसके अलावा जिले की विभिन्न बैंकों में किसान क्रेडिट कार्ड के ऋणी किसानों के फसल बीमा करने की जिम्मेदारी होती है। इन किसानों के बैंक खातों से बैंक स्वयं ही प्रीमियम राशि काट लेते हैं और किसान की फसल के बीमा का विवरण बीमा कंपनी के पोर्टल पर अपलोड कर देते हैं।
वर्ष 2019 में खरीफ की फसल का बीमा 1,726 किसानों ने स्वंय ही बीमा कपंनी से कराया था। इसके अलावा जनपद के विभिन्न बैंकों में ऋणी 1,49,821 किसानों की बीमा प्रीमियम राशि को बैंकों द्वारा काट ली गई। इस तरह 1,51,547 किसानों का डाटा बीमा कंपनी के पोर्टल पर अपलोड हुआ। इसके अलावा बैंकों ने 7,151 और किसानों के फसल बीमा के लिए प्रीमियम राशि काट ली, लेकिन, इन किसानों का डाटा बैंक कर्मचारियों ने अपलोड नहीं किया और इसके बाद प्रधानमंत्री किसान बीमा का पोर्टल बंद हो गया, जिससे इन किसानों का बीमा क्लेम अटक गया। विभागीय कर्मचारियों ने पत्राचार किए, लेकिन पोर्टल नहीं खुल सका है। ऐसे में अब इसका खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। इससे अब इन किसानों बीमा क्लेम का भुगतान नहीं मिल पा रहा है। लेकिन, बैंक इन किसानों के बारे में बता रहे हैं कि अधिकांश किसानों की मृत्यु हो गई है अथवा वह घर से बाहर रहे हैं।
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फसल बीमा कंपनी के पोर्टल पर जिन किसानों का डाटा अपलोड नहीं हुआ है, उनमें से अधिकांश किसान या तो घर छोड़कर बाहर रह रहे हैं, या फिर उनकी मृत्यु हो चुकी है।
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- एस के श्रीवास्तव, एलडीएम, पीएनबी
यदि बीमा प्रीमियम राशि कटने के बाद किसान की मृत्यु हो गई तो उसके बीमा क्लेम का भुगतान किया जाएगा।
- संतोष कुमार सविता, उप कृषि निदेशक
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