ललितपुर। शहर स्थित चांदमारी की जमीन पर वर्षों से चले आ रहे मुकदमे में श्री वर्णी जैन समिति को सफलता मिल गई है, जबकि पुलिस मुकदमे में हार गई है। सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने 18 वर्ष बाद चांदमारी की जमीन के मुकदमा में जैन समिति के पक्ष में निर्णय सुनाया है।
श्री वर्णी जैन समिति के अध्यक्ष कपूर चंद्र जैन द्वारा वर्ष 1998 में न्यायालय में वाद प्रस्तुत करते हुए बताया था कि उनकी समिति अन्य शिक्षण संस्थाओं के अलावा श्री वर्णी जैन इंटर कालेज और श्रीवर्णी जैन कान्वेंट स्कूल के नाम से संस्था चलाती है। उसकी संपत्ति की सुरक्षा व देखरेख का कार्य समिति का है। उनकी समिति नगर पालिका अंदर हद मुहल्ला सिविल लाइन स्थित आराजी संख्या 1782/1 रकबा 30 एकड़ पर संक्रमणीय भूमिधर है एवं मौके पर काबिज है।
विपक्षी का उक्त आराजी से कोई संबंध व सरोकार न तो रहा है और न है, न ही प्रतिवादी के उक्त आराजी में स्वत्व व अधिकार एवं कब्जा दखल रहा है। यही नहीं उक्त आराजी के किसी भी अंश पर किसी भी प्रकार से कोई निर्माण करने का अधिकार भी नहीं है।
इस विवादित आराजी पर समिति का श्री वर्णी कान्वेंट स्कूल, जैन धर्म का प्रतीक चिह्न मेरु पर्वत और भगवान आदिनाथ की पांडुकशिला बनी हुई हैं और खेल का मैदान है। पांच अप्रैल 1998 को जब समिति द्वारा बाउंड्रीवाल एवं पिलर बनाने का निर्माण किया जा रहा था, तो वहां कुछ पुलिस कर्मी आए आए और समिति का निर्माण कार्य बंद करा दिया था और मजदूूरों को भगा दिया था। जब समिति के सदस्यों ने इसका विरोध किया तो सभी को बंद कर देने की धमकी दी। इस पर समिति ने न्यायालय में वाद दायर किया। साथ ही पांडुक शिला, मेेरुपर्वत एवं अन्य निर्माण ध्वस्त करने से रोके जाने की मांग की।
तब से यह मामला तब से न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। सिविल जज सीनियर डिवीजन आनंद प्रकाश सिंह के न्यायालय ने उक्त 30 एकड़ जमीन पर वर्षों से चल आ रहे वाद में दोनों पक्षों की ओर से दी गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए बृहस्पतिवार को श्री वर्णी जैन समिति के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए दावा वादी डिक्री कर दिया। न्यायालय ने आदेशित किया कि जैन समिति के शांतिपूर्ण कब्जे और दखल में कोई विघ्न- बाधा पैदा न करें और न ही गैर कानूनी तरीके से समिति को बेदखल करे। न ही उक्त आराजी में स्थित पांडुक शिला, मेरुपर्वत व अन्य निर्माण का ध्वस्त करें। न्यायालय के इस निर्णय से जैन समाज में खुशी की लहर है। हालांकि, पुलिस चाहे तो उच्च न्यायालय में अपील कर सकती है।
विधिक सलाह लेकर उचित कदम उठाया जाएगा।
- सुधा सिंह
अपर पुलिस अधीक्षक