ललितपुर। जिले भर में पांच जुलाई को 48 लाख पौधे रोपे गए, लेकिन उनका रखरखाव और संरक्षण नहीं होने से दो सप्ताह में ही पौधे दम तोड़ने लगे हैं। ऐसा ही मामला ब्लॉक महरौनी के ग्राम कुम्हैड़ी में सामने आया है, जहां पर 7500 पौधे रोपे गए थे, लेकिन देखरेख के अभाव में अब तक 60 फीसदी पौधे नष्ट हो चुके हैं।
महरौनी ब्लॉक के ग्राम कुम्हैड़ी में रोपे गए ज्यादातर पौधे सूख गए, या फिर नष्ट हो गए हैं। गांव में चार अलग- अलग स्थानों में पौधरोपण किया गया था। रोजगारसेवक के अनुसार गांव की मंडी में 3,500, ग्राम छायन- कुम्हैड़ी मुख्य मार्ग पर दो हजार, कुम्हैड़ी से लरगन व बौरान मार्ग पर क्रमश: एक-एक हजार पौधे रोपे गए थे। मंडी में रोपे गए आधे पौधे पानी नहीं मिलने से सूख गए हैं। कुछ नष्ट हो गए हैं। मुख्य मार्गों में रोपे गए पौधों की स्थिति बेहद खराब है, न ही अब तक उन्हें पानी दिया गया और न ही उनका संरक्षण हुआ है, जिससे पौधे उजड़ गए हैं।
मुख्य मार्गों में रोपे गए चार हजार पौधों में से मात्र सैकड़ों की संख्या में ही पौधे बच पाए हैं। ग्राम पंचायत में पौधे रोपे जाने के बाद उनका किसी भी प्रकार से संरक्षण नहीं हुआ और न ही उन पौधों की देखरेख की गई। इस कारण से पौधे नष्ट होते जा रहे हैं।
अधिकारी ग्राम पंचायत का हवाला दे देते हैं और ग्राम पंचायत के जिम्मेदार सरकार को कोसने लगते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पांच जुलाई से बारिश नहीं हुई और पौधों को पानी देने के लिए किसी जिम्मेदार ने अपनी जिम्मेदारी नहीं समझी, जिससे पौधे नष्ट होते जा रहे हैं। बिना पानी के पौधों को जीवित नहीं रखा जा सकता है। इसलिए अगर पौधे रोपे गए हैं तो देखरेख आवश्यक है।
ग्राम कुम्हैड़ी में पांच जुलाई को पौधारोपण हुआ था, जिसमें साढ़े सात हजार पौधों को रोपा गया था। लेकिन, इन पौधों की देखरेख नहीं होने से साठ फीसदी से ज्यादा पौधे नष्ट हो गए हैं। किसी ने भी पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी नहीं ली थी, इसलिए उजड़ गए।
- संतोष निरंजन
रोपे गए पौधों को अभी तक पानी नहीं दिया गया, जिससे सूख गए और इन पौधों की कोई देखरेख नहीं हो रही है। इस कारण नष्ट हो गए हैं। गांव का कोई व्यक्ति प्रतिदिन पौधों को पानी देता तो पौधे नष्ट नहीं होते। पौधे तो कई बार लगाए गए हैं, लेकिन देखरेख नहीं होती है।
- सौरभ जैन
गांव में जितने भी पौधे रोपे गए थे, उनमें से अब आधे भी नहीं बचे हैं। क्योंकि, पौधरोपण के नाम पर केवल रस्म अदायगी हुई है। पौधों का संरक्षण नहीं हुआ। पौधों की गिनती के साथ- साथ उनका संरक्षण होना चाहिए। बिना संरक्षण के पौधे सूख कर नष्ट हो रहे हैं।
- दीपक निरंजन
पौधरोपण प्रत्येक वर्ष कराया जाता है, लेकिन पौधरोपण के बाद पौधों की सुध कोई नहीं लेता है। इस कारण पौधे मर जाते हैं। पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता है। अगर पौधे रोपे जाते हैं तो उनका संरक्षण और रखरखाव भी जरुरी है। इस समय पौधों का संरक्षण जरुरी है।
- जमुनाप्रसाद
गांव में सात हजार पांच सौ पौधे रोपे गए थे। इनको एक बार पानी दिया गया था। पौधे इसलिए सूख रहे हैं, क्योंकि यहां बारिश भी नहीं हो रही है। इस समय तो फसलें भी सूख रही हैं, ये तो पौधे ही हैं। लगाए गए इन पौधों का संरक्षण न होने से स्थिति और भी खराब हो रही है।
- रूप सिंह, ग्रामसेवक
हमारे गांव में 7,500 पौधे रोपे गए थे। इनमें से 3500 पौधे गल्ला मंडी और बकाया 4,000 पौधे मुख्य मार्गों के किनारे रोपे गए थे। मंडी के पौधों का संरक्षण तो है, लेकिन मुख्य मार्गों में पौधों को प्रशासन को जाली से संरक्षित कराना चाहिए था। बारिश नहीं होने से पौधे सूख रहे हैं।
- मुकेश रिछारिया, प्रधान प्रतिनिधि
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ग्राम कुम्हैड़ी में पौधों के सूखने व नष्ट होने की सूचना मिली है, इसको दिखवाया जाएगा।
- सुनील कुमार, खंड विकास अधिकारी महरौनी