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Lalitpur News: पितृ पक्ष शुरू, पुरखों को याद कर कुश से किया तर्पण

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ललितपुर। रविवार को पितृपक्ष शुरू होते ही लोगों ने अपने पूर्वजों को याद कर सुम्मेरा तालाब व अन्य जल स्रोतों में कुश के साथ तर्पण किया। अब 15 दिनों बाद नवरात्र से ही शुभकार्य शुरू होंगे।
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शास्त्रों के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक का समय श्राद्ध या महालय पक्ष कहलाता है। यह अवधि पितरों के श्राद्ध कर्म के लिए विशेष रूप से निर्धारित किए गए हैं। पितृ पक्ष में किए गए कार्यों से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। रविवार को बह्म मुहूर्त से ही सनातन धर्म के लोगों ने सुम्मेरा तालाब एवं आसपास के अन्य पोखरों व तालाबों में तिल, उड़द आदि लेकर कुश से पूर्वजों को पानी दिया।
सुम्मेरा तालाब के घाटों पर वेदपाठी आचार्यों ने मंत्रोच्चार के साथ तर्पण कराया। वहीं, तालाब नहीं पहुंचने वाले लोगों ने घरों में ही पूर्वजों को याद कर तर्पण किया। रविवार को चंद्रग्रहण का सूतक लगने के कारण लोगों ने पूर्वजों के नाम का श्राद्ध 12:57 बजे से पहले ही कर लिया।
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पंडित हरिओम शास्त्री ने बताया कि भाद्र शुक्ल पक्ष में रविवार को पितरों का आह्वान हुआ है। पूर्णमासी से 15 दिनों तक पितृ पृथ्वी पर वास करते हैं। इन 16 दिनों दान, तर्पण करने का महापर्व है। राजा कर्ण ने भगवान विष्णु से 15 दिन दान करने के लिए मांगे थे। इन दिनों में अन्नदान, भोजन दान का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि इन दिनों में पंचवली दान का खास महत्व होता है। पंचवली दान के अंतर्गत गाय, श्वान, कौआ, देव और चीटियों के लिए भी भोजन निकाला जाता है। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षिणा देना चाहिए।
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मन तालाब पर पूर्वजों का किया तर्पण
बांसी। पितृ पक्ष शुरू होते ही लोगों ने रविवार को बांसी मन तालाब पर पहुंचकर अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया। कुछ लोगोंं ने नदी किनारे जाकर जलदान किया। हिंदू धर्म के अनुसार पितृ व देवताओं के आशीर्वाद व उनकी संतुष्टि के लिए पितृ पक्ष में एक पखवाड़े तक लोग अपने पूर्वजों का तर्पण कर उन्हें जल देते हैं। मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में एक पखवाड़े तक नित्य जल तर्पण और दान पुण्य करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता और उनकी आत्मा को शांति मिलती है। संवाद
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