संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में व्याप्त अव्यवस्थाएं मरीजों व तीमारदारों पर भारी पड़ रही हैं। मुख्य द्वार पर उखड़े ब्रिक्स से फैली मिट्टी से प्रवेश करना मुश्किल हो रहा है। परिसर में खुली नालियों से उठती दुर्गंध से ठहरना तो दूर निकलना तक दुश्वार हो गया है।
यहां निर्माण कार्य से व्यवस्थाएं पूरी तरह बेपटरी हो गई हैं। हल्की बारिश में ही मुख्य द्वार से निकलना मुश्किल हो जाता है। कारण, सीधे आने पर चिकनी मिट्टी से फिसलकर गिरने का भय है। पंजीकरण खिड़की के बाहर भी नालियों का चैंबर खुला पड़ा है। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के सामने गंदगी से खड़ा होना तक मुश्किल है। पैथोलॉजी के गेट के पहले खुली नाली से निकलने में दिक्कत हो रही है। महिला अस्पताल की ओर प्रवेश करने पर नाली खुली पड़ी है। इससे बच्चों व महिलाओं का निकलना मुश्किल हो गया है। इस नाली से उठती दुर्गंध उठ रही है। जगह-जगह मेडिकल कचरा खुले में पड़ा है, सिरिंज भी खुले में पड़ी है।
-
वार्डों में उठ रही दुर्गंध : वार्डों में पहले ही मरीजों की संख्या अधिक है। हालात यह है कि महिला वार्ड में लगभग 20 मरीज जमीन पर लेट कर उपचार करा रहे हैं। ऐसे में सफाई व्यवस्था चौपट होने से दुर्गंध उठ रही है। कचरा भी पड़ा हुआ है। तीमारदार ही नहीं मरीजों का रुकना मुश्किल है। कई मरीज तो भाग तक जाते हैं। छत से टपकते पानी से भी दिक्कत हो रही है। इससे कीचड़ हो गया है।
-
महिला एवं सर्जिकल वार्ड के बाहर गंदगी : मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने वार्ड तो शिफ्ट कर दिया, लेकिन व्यवस्थाएं नहीं की गई हैं। डस्टबिन न होने से मरीज व तीमारदार गंदगी को गेट के बाहर ही डाल रहे हैं। एक पलंग का चद्दर तक कचरा में पड़ा हुआ है।
-
वाटर कूलर तक नहीं स्वच्छ : परिसर में दवा वितरण कक्ष के पास मुख्य द्वार पर ठंडे पानी की सुविधा के लिए वाटर कूलर लगाया गया है। स्थापित होने के चार माह बाद भी इसकी सफाई ठीक से नहीं हुई है। वाटर कूलर के पास भारी मात्रा में गंदगी पड़ी है। दूषित पानी भी जमा हो गया है। कई लोग इसकी हालत देखकर प्यासे ही वापस हो जाते हैं।