कलौथरा। कोरोना महामारी के चलते किसानों को भारी नुकसान हुआ है। किसानों को चना व मसूर का सही दाम नहीं मिल रहा है। उन्हेें औने-पौने दामों पर अपनी जिंस बेचनी पड़ रही है। जबकि, प्रति वर्ष सरकारी खरीद केंद्र खोले जाते हैं।
किसानों की की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। विपणन वर्ष 2020-21 के लिए रबी की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी करते हुए केंद्र सरकार ने चना का समर्थन मूल्य 4875 रुपये व मसूर का 4800 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरे। प्रदेश के सभी जिलों में चना व मसूर की जिले में अच्छी पैदावार होती है। जबकि, बाजार में मटर का भाव 4300 से 4600 रुपये, चना 3700 से 4000 रुपये और मसूर 5200 से छह हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। इस कारण किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वर्ष 2018-19 नैफेड द्वारा पीसीएफ के माध्यम से सरकारी समितियों द्वारा सरकारी खरीद की गई थी, जिसमें जिला में सबसे ज्यादा खरीद की गई थी। महरौनी, पाली व मड़ावरा तहसील में अच्छी पैदावार होती है। झांसी, बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन आदि जिलों में चना व मसूर की सरकारी हो रही है, लेकिन ललितपुर में खरीद नहीं हो रही है।
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मंडी मे चना का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। अगर जिले में चना की सरकारी खरीद की जाती है तो सही दाम मिल जाएगा
- प्रेमनारायन, किसान सिंगेपुर
- पहिलवान यादव, किसान कलौथरा
सरकार केवल किसानों के लिए घोषणा करती है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं होता है। किसान दिन रात मेहनत से अपनी फसल को तैयार करता है, लेकिन सही मूल्य नहीं मिलता है।
- विजय पाराशर, किसान बिरधा
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हमने अपना चना और मसूर अभी तक नहीं बेचा है, क्योंकि हमने सोचा था की जिले में चना की सरकारी खरीद की जाएगी। चना का सही दाम मिल जाएगा, लेकिन अब क्या करें। मंडी में व्यापारियों द्वारा किसानों की फसल औने- पौने दामों में खरीदी जा रही है।
- जयनारायन साहू, किसान बिरधा
हम किसानों को कभी भी फसल का सही दाम नहीं मिल पाता है। जो सरकार से आस लगाए हुये थे वह भी आस टूट गई है, क्योंकि जिले में एक भी सरकारी कांटा चना व मसूर खरीद के लिए आवंटित नहीं हुआ है।
- कैलाश निरंजन, किसान कलौथरा
हम किसानों का खरीफ की फसल पूरी तरह से बरबाद हो चुकी थी। इसके बाद हमने खेतों में चना व मसूर की खेती की। उम्मीद थी कि किसानों की जिंस सही दामों पर सरकार खरीदेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। किसानों को निराशा ही हाथ लगी है।
- राजीव राजा, किसान पिपरिया डोंगरा
हमारे क्षेत्र में सबसे ज्यादा चना, मसूर व मटर की पैदावार होती है। किसानों को जिन्स का कभी सही दाम नहीं मिल पाता है। जब किसान को उसकी फसल का सही दाम नहीं मिलेगा तो आय कैसे दोगुनी होगी। किसान अपने भाग्य को कोसता रहेगा।
दौलतराम विश्वकर्मा, किसान बिरधा
लॉकडाउन का का फायदा उठाकर किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है। किसानों को उसकी फसल का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- रंजीत यादव, जिलाध्यक्ष (भारतीय किसान यूनियन अराजनीतिक)
अबकी बार जिले में चना और मसूूूर के लिए कोई सरकारी खरीद केंद्र नहीं खोला गया है। इस कारण किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
- राकेश कुमार त्रिपाठी, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी