संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। नेहरूनगर स्थित पुरातत्व संग्रहालय में जनपद समेत आसपास के मध्य प्रदेश के जिलों के ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थलों के चित्र स्थापित होने के साथ ही स्क्रीन डिस्प्ले भी किया जाएगा। यहां पर्यटकों को अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएगी।
नेहरूनगर स्थित पुरातत्व संग्रहालय में जनपद के विभिन्न स्थलों से संग्रहित की गईं लगभग 134 प्राचीन मूर्तियों को रखा गया है, जो लंबे समय तक उपेक्षा का शिकार रहीं। अब पुरातत्व विभाग द्वारा इस संग्रहालय का जीर्णोद्धार करते हुए इसे आधुनिक स्वरूप दे रहा है। इसमें आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। यहां स्थापित प्राचीन मूर्तियों को सुरक्षित व व्यवस्थित तरीके से स्थापित किया जाएगा। जहां पर्याप्त लाइटिंग और उनके सामने उनके नामों की पट्टिकाएं भी रखी जाएंगी, ताकि पर्यटकों को उनके इतिहास के बारे में जानकारी मिल सकेगी। इसके साथ ही विभाग द्वारा जनपद के साथ ही आसपास के पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के टीकमगढ़, सागर, अशोकनगर, चंदेरी आदि क्षेत्रों के प्राचीन मोमेंटम के चित्रों के लगाने के साथ ही उन्हें स्क्रीन डिस्प्ले भी किया जाएगा। इससे पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी और इन मूर्तियों का रखरखाव भी बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।
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संग्रहालय में छठवीं से 12वीं सदी की मूर्तियां हैं संरक्षित
संग्रहालय में 12वीं सदी का धौरीसागर गांव से मिला वास्तुखंड, छठवीं सदी की कुचदौं से प्राप्त चैत्य गवाक्ष युक्त रथिका में यम, नौंवी सदी की ग्राम कुचदौं से मिली शुकनास की मूर्ति, कुचदौं से ही मिली दसवीं सदी की लेटे हुए विष्णु की मूर्ति, दसवीं सदी की रथिका में कुबेर की मूर्ति, दसवीं सदी की ही कुचदौं से मिली विष्णु प्रतिमा, नौंवी सदी की माहेश्वरी प्रतिमा का अधोभाग, नौंवी सदी की यमी की प्रतिमा, नौवीं सदी की वैष्णवी मूर्ति, बारहवीं सदी की भैरव प्रतिमा, ग्राम धौरीसागर से मिली 11वीं सदी की सप्तमातृका पट्ट की प्रतिमाओं समेत करीब 134 मूर्तियों को संरक्षित किया गया है।
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नेहरूनगर में स्थित पुरातत्व संग्रहालय में जनपद के साथ ही आसपास के मध्य प्रदेश के जिलों के पुरातत्व स्थलों के चित्रों को लगाने के साथ ही उन्हें स्क्रीन डिस्प्ले भी किया जाएगा। म्यूजियम का काम भी तेजी से किया जा रहा है, यह जल्द ही तैयार हो जाएगा।
राजीव कुमार त्रिवेदी, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, झांसी।