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Lalitpur News: कम बारिश से उड़द-मूंग की फसलों पर कीटों का हमला

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संवाद न्यूज एजेंसी
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अर्जुन खिरिया। नाराहट क्षेत्र में बीती जुलाई के बाद से पर्याप्त बारिश नहीं होने की वजह से अब खरीफ की उड़द और मूंग की फसलों पर कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ने लगा है। खेतों में पत्ती छेदक कीट (लीफ ईटिंग कैटरपिलर) सहित कई प्रकार के कीट पत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे फसल की बढ़वार प्रभावित होने लगी है और किसानों की चिंता बढ़ गई है।
बारिश नहीं होने के कारण कीटों द्वारा पत्तियों को जगह-जगह से खाकर उनमें अनेक छेद किए जा रहे हैं। इससे पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्षमता प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। अब यदि जल्द ही वर्षा नहीं होती है और समय पर नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए तो किसानों को फसलों में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। स्थानीय किसान फूल सिंह यादव, राम सिंह, रामसहाय आदि का कहना है कि लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण फसल कमजोर हो गई है और कीटों का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। किसानों ने कृषि विभाग से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराकर आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने और तकनीकी सलाह देने की मांग की है। बताया गया कि इस समय उड़द और मूंग की फसलों में कीटों का आक्रमण बढ़ गया है। इनका समय से नियंत्रण किया जाना आवश्यक है। मूंग-उड़द की फसलों में अधिकांश सफेद मक्खी, फली छेदक इल्ली, माहू और बिहार रोमिल इल्ली का प्रकोप देखने को मिल रहा है।
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फोटो-20
कैप्सन-फूल सिंह यादव।
एक तो मानसून देर से आने से उड़द, मूंग, तिल एवं सोयाबीन की बुवाई लेट हो गई। खेतों में बुवाई तो हो गई लेकिन अब एक महीना से बारिश नहीं होने से कई प्रकार के कीटों का प्रकोप बढ़ गया है, जो पत्तों को खा रहे हैं। साथ ही फसलों की बढ़वार भी रुक गई है।
फूल सिंह यादव, किसान।
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फोटो-21
कैप्सन-सत्यनारायण तिवारी।
एक-दो जुलाई के लगभग खेतों में उड़द, सोयाबीन, मूंग, तिल, मूंगफली की बोआई की थी। खेतों में फसलों का जमाव भी ठीक हुआ और खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव भी हो गया, लेकिन आखिरी पानी पांच-छह जुलाई को गिरा था। तब से अभी तक बारिश नहीं होने से फसलें कमजोर हो गई हैं और कई प्रकार के कीट भी पनप गए हैं, जो फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं।-सत्यनारायण तिवारी, किसान।
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वैज्ञानिक ने बताए फसलों को बचाने के उपाय



पत्ती भक्षक या इल्ली वर्गीय कीटों की रोकथाम के लिए लैंबडासाइटेलोथ्रिन 10 ईसी का 0.5 मिलीलीटर, क्विनोल्फॉस 25 ईसी का 2.5 मिली या फेनवेलरेट 20 ईसी का 2 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करने से नियंत्रित किया जा सकता है। वहीं माहू या सफेद मक्खी जैसे रसचूसक कीटों का प्रकोप होने की स्थिति में 0.3 मिली इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल का प्रति लीटर पानी में उपयोग कर 15-15 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करें या थियामेथोक्साम 25 डब्ल्यूपी का 0.3 ग्राम लीटर या नीम तेल 5 प्रतिशत का 50 ग्राम प्रति लीटर का छिड़काव करना लाभप्रद होता है।-डॉ. दिनेश तिवारी, कृषि विज्ञान केंद्र।



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