संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। रबी के सीजन में मौसम के बिगड़े मिजाज से दलहनी फसलों में मटर की पैदावार प्रभावित हो गई है। एक क्विंटल बीज में जहां गत वर्ष करीब 15 क्विंटल पैदावार हुई थी, वहीं इस साल सात से आठ क्विंटल ही पैदावार रह गई है। ऐसे में खेती की लागत तक नहीं निकल रही है। किसानों ने कहा, कम उत्पादन से नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बीते वर्ष 2023 के दिसंबर में अंतिम सप्ताह से जनवरी 2024 के दूसरे सप्ताह तक लगातार बादल व कोहरा छाया रहा। 15 से 20 दिन तक धूप नहीं निकली। इससे दलहनी फसलों में मटर की खेती सबसे अधिक प्रभावित हुई थी। इसके बाद धूप निकली तो पाला पड़ गया। रही सही कसर बारिश ने पूरी कर दी। ऐसे में बीते वर्ष जहां मटर की पैदावार एक क्विंटल बीज में 15 क्विंटल से अधिक थी, वहीं इस साल महज सात से आठ क्विंटल रह गई। किसानों ने बताया कि प्रति क्विंटल पर लगभग आठ से दस हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। चार माह से मेहनताना तो दूर लागत तक नहीं निकल रही है। उन्होंने फसल के नुकसान का आकलन कर सहायता व बीमा क्लेम दिलाने की मांग की है।
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कैप्सन- रामस्वरुप
मटर की फसल को लगातार मौसम में हुए परिवर्तन से नुकसान पहुंचा है। अब लागत तक नहीं निकल पा रही है। -रामस्वरूप
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कैप्सन- कमलेश
मड़ाई के बाद मात्र छह से आठ गुना पैदावार निकल रही है। इससे प्रति क्विंटल आठ से दस हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। -कमलेश
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मटर की एक हेक्टेयर फसल में लागत
नाम - राशि
बीज - 08-10 हजार रुपये
तीन बार जुताई - आठ हजार
बीज शोधन - 700
डीएपी - 2800
सिंचाई - 7500
यूरिया छिड़काव - 500
दवा छिड़काव - 2000
कटाई - 6000
मड़ाई - 6000
ट्रैक्टर-थ्रेसर - 2000-
कुल लागत - 43500
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क्रॉप कटिंग कराई जा रही है। इसके आंकड़ों के आधार पर नुकसान का आकलन किया जाएगा। इसके बाद किसानों के नुकसान की भरपाई की जाएगी।-राजीव कुमार भारती, जिला कृषि अधिकारी